चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार से रविवार तक नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होंगे. यह जानकारी चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहा यह दौरा शी जिनपिंग की सात साल में भारत की पहली यात्रा है और इसे भारत-चीन रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ा मौका बताया जा रहा है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय और चीनी विशेषज्ञों के हवाले से इस दौरे और भारत के रुख की खुलकर तारीफ की है, जिसकी चर्चा भारतीय मीडिया में भी हो रही है.
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इस यात्रा को छप रहे खबरों को एक बड़े स्तर की कूटनीतिक पहल बताया है, जिसका असर दोनों एशियाई ताकतों के आपसी रिश्तों को स्थिर करने की कोशिशों पर पड़ेगा.
भारतीय थिंक टैंक के प्रमुख मोहम्मद साकिब ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति के इस दौरे ने ब्रिक्स सम्मेलन की अहमियत को काफी बढ़ा दिया है. वहीं सिंघुआ यूनिवर्सिटी के छ्यान फंग ने कहा कि भारत इस मुलाकात को रिश्तों को बेहतर बनाने का बहुत अच्छा मौका मानता है और दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की भी उम्मीद है.
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नई दिल्ली में सम्मेलन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं. सड़कों और बाजारों में सम्मेलन के पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं, साथ ही सुरक्षा भी काफी बढ़ा दी गई है. सम्मेलन स्थल भारत मंडपम पर भी अंतिम समय की सजावट का काम चल रहा है. छ्यान फंग ने अगस्त में हुई सीमा वार्ता का भी जिक्र किया, जिसमें 25वें दौर की बातचीत में आठ सूत्री सहमति बनी थी. इसे रिश्तों में सुधार का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और आगे किसी भी प्रगति को इसमें अतिरिक्त फायदे जैसा बताया गया.
रिपोर्ट में भारत की आर्थिक स्थिति का भी जिक्र है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी करीब 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है और इसी दौरान चीन के साथ भारत का कुल व्यापार करीब 151 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है.
साकिब ने कहा कि भारत अब अपनी विदेश नीति को नए सिरे से तय कर रहा है, क्योंकि यह मानना कि अमेरिका से नजदीकी अपने आप भारत के विकास में मदद करेगी, सही नहीं निकला. उन्होंने भारत और चीन के बीच पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों का भी हवाला दिया.
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