LPG के बाद क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम? केंद्र सरकार ने बता दिया अपना प्लान

LPG की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनियों के पास आवश्यक वृद्धि को वहन करने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता है.

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पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावनाएं. (File photo: ITG) पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावनाएं. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:52 AM IST

घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) के दामों में शनिवार को भारी बढ़ोतरी की गई है. गैर-सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी गई है. ये पिछले 11 महीनों में दूसरी बार कीमतों में वृद्धि है. सरकार का कहना है कि इस साल की शुरुआत में तेल कंपनियों ने बंपर मुनाफा कमाया था और उनके पास इस तरह के प्रभाव को झेलने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता है. 

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक बाजार में ऊर्जा कीमतों में आए भारी उछाल के चलते भारत सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में ₹60 की भारी बढ़ोतरी कर दी है. हालांकि, राहत की बात ये है कि सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने से इनकार कर दिया है.

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सूत्रों ने स्पष्ट किया कि एलपीजे के दाम बढ़ने के बावजूद सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल-डीजल के दामों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, क्योंकि तीन ईंधन विपणन कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने इस साल की शुरुआत में बंपर मुनाफा कमाया था और उनके पास इस तरह के प्रभाव को झेलने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता है.

2022 से स्थिर थी कीमतें

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर बनी हुई हैं. कंपनियां कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के अनुसार अपने मुनाफे और नुकसान को समायोजित कर रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.

अब दिल्ली में इतने के मिलेगा LPG सिलेंडर

भारतीय ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) की वेबसाइट के अनुसार, इस भारी बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब गैर-सब्सिडी वाला 14.2 किलोग्राम का घरेलू एलपीजी सिलेंडर 913 रुपये का हो गया है, जो पहले 853 रुपये था. मुंबई में ये 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये हो गया है. कीमतों में अंतर राज्य स्तर पर स्थानीय सेल्स टैक्स या वैट के कारण होता है.

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों  (जिन्हें 2016 से मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं और जो 10 करोड़ से अधिक हैं) को भी ये बढ़ोतरी सहन करनी होगी. उन्हें प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है (साल में अधिकतम 12 रिफिल तक), इसलिए अब उन्हें 613 रुपये प्रति सिलेंडर चुकाने पड़ेंगे.

सरकार के शीर्ष सूत्रों ने बताया कि ये बढ़ोतरी वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल के कारण की गई है.  इसके बावजूद भारत में एलपीजी की कीमत ब्रेकईवन स्तर (लागत पर बराबर) से कम है जो 1,050 रुपये प्रति सिलेंडर के आसपास है.
उन्होंने कहा कि एक औसत परिवार साल में 4-5 सिलेंडर इस्तेमाल करता है तो ये बढ़ोतरी प्रति परिवार प्रतिदिन मात्र 80 पैसे और चार सदस्यों वाले परिवार में प्रति व्यक्ति सिर्फ 20 पैसे के बराबर है.

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अन्य देशों से सस्ती है भारत में LPG गैस

सूत्रों ने कहा कि बढ़ी हुई कीमतों के बाद भी भारत में एलपीजी ज्यादातर देशों से सस्ती है. उदाहरण  के लिए- काठमांडू में एक सिलेंडर 1,207 रुपये, श्रीलंका में 1,241 रुपये और पाकिस्तान में 1,046 रुपये का पड़ता है.

वहीं, घरेलू गैस के साथ-साथ होटलों और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी ₹114.5 की बड़ी बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर ₹1,883 का मिलेगा.

इस साल अब तक कमर्शियल गैस की कीमतों में ₹302.50 की वृद्धि हो चुकी है. इससे पहले 1 मार्च को भी इसकी कीमत में ₹28 का इजाफा किया गया था. व्यापारियों के लिए ये इस महीने का दूसरा बड़ा झटका है, जिससे बाहर खाना खाना और महंगा हो सकता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही ठप

कीमतों में इस अचानक उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले हैं. इस सैन्य संघर्ष के कारण तेल और गैस से समृद्ध मध्य पूर्व में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (जलडमरूमध्य) जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, वहां टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. ईरान और ओमान के बीच स्थित ये रास्ता बंद होने से ऊर्जा की वैश्विक आपूर्ति चेन चरमरा गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल और गैस के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं.

28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में 35.63 प्रतिशत की ऐतिहासिक साप्ताहिक वृद्धि देखी गई है. वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स $90.90 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड $92.69 प्रति बैरल पर बंद हुआ है.

एशियाई बाजारों में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कीमतें भी उछल कर $25.40 प्रति एमएमबीटीयू (MMBtu) पर पहुंच गई हैं जो तीन साल का उच्चतम स्तर है. कतर से निर्यात रुकने की आशंका और रसद संबंधी बाधाओं ने एलपीजी बाजार में भी भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल और 40 प्रतिशत प्राकृतिक गैस होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आयात करता है. एलपीजी के मामले में ये निर्भरता और भी अधिक है. भारत ने साल 2024-25 में 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत की, जिसमें से केवल 12.8 मिलियन टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर हुआ. शेष आयातित मात्रा का 85-90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब जैसे उन देशों से आता है जो इसी जलमार्ग का इस्तेमाल करते हैं. ईरान द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमलों के बाद ये मार्ग प्रभावी रूप से अवरुद्ध हो गया है.

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उत्पादन में तेजी लाएं रिफाइनरी

घरेलू बाजार में रसोई गैस की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने शुक्रवार को अपनी विशेष 'इमरजेंसी पावर' का इस्तेमाल किया है. इसके तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी क्षमता बढ़ाकर एलपीजी के उत्पादन में तेजी लाएं.

सरकार का टारगेट है कि अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के बावजूद देश के अंदर ईंधन की आपूर्ति निरंतर बनी रहे. हालांकि, वैश्विक स्तर पर कीमतों का बढ़ना भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती साबित हो रहा है.

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