यूपी चुनाव पर SP-कांग्रेस से नहीं मिला जवाब, बोले ओवैसी- 'जबरदस्ती गठबंधन नहीं होता'

ओवैसी ने खुलासा किया कि उन्होंने हिंदुत्व की राजनीति को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों को गठबंधन की पेशकश की थी, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया, उन्होंने साफ किया कि गठबंधन कभी एकतरफा नहीं हो सकता.

Advertisement
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026 में असदुद्दीन ओवैसी (Photo-ITG) इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026 में असदुद्दीन ओवैसी (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:35 PM IST

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026' के मंच पर AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने देश की मौजूदा राजनीति, अल्पसंख्यकों की स्थिति, कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों की नीतियों पर खुलकर बात रखी. ओवैसी ने कहा कि देश में आजादी के बाद से शासन करने वाली सरकारों ने मुस्लिम समुदाय को केवल एक 'वोट बैंक' की तरह इस्तेमाल किया है और उन्हें कभी भी एक स्वतंत्र और मजबूत राजनीतिक नेतृत्व विकसित करने का अवसर नहीं दिया.

Advertisement

ओवैसी ने स्पष्ट किया कि उन्हें भारत के संविधान और इसके सिद्धांतों पर पूरा भरोसा है, लेकिन देश पर राज करने वाली सरकारों ने अल्पसंख्यकों के साथ न्याय नहीं किया, उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने भारत में ही रहने का फैसला किया था क्योंकि वे 'दो-राष्ट्र के सिद्धांत' में विश्वास नहीं रखते थे. संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 29 और 30 हर नागरिक को समानता और अधिकार देते हैं, लेकिन नेहरू से लेकर मोदी तक की सरकारों ने मुसलमानों को राजनीतिक रूप से शक्तिहीन बनाए रखा, जिसके कारण आज डेटा के अनुसार मुस्लिम समुदाय शिक्षा, अर्थशास्त्र और सामाजिक सूचकांकों में सबसे निचले पायदान पर खड़ा है.

'कम बुरे विकल्प' को वोट देने को मजबूर थे मुस्लिम

जब ओवैसी से सवाल किया गया कि मुस्लिम समुदाय फिर भी अक्सर कांग्रेस जैसी पार्टियों को वोट क्यों देता है, तो उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने हमेशा 'दो बुराइयों में से कम बुरी' पार्टी को चुना है क्योंकि उनके पास कोई अन्य व्यावहारिक विकल्प मौजूद नहीं था, उन्होंने बताया कि आज संसद में मुस्लिम प्रतिनिधित्व बहुत कम रह गया है. एक तरफ जहां भाजपा मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट न देकर उन्हें पूरी तरह दरकिनार करती है, वहीं दूसरी तरफ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दल मुसलमानों को सिर्फ यह कहकर डराते हैं कि भाजपा उन्हें खत्म कर देगी, इसलिए उन्हें इस बात के लिए आभारी होना चाहिए कि ये पार्टियां उन्हें सिर्फ 'जिंदा' रख रही हैं.

Advertisement

मोहन भागवत के अमेरिका में दिए बयान पर प्रतिक्रिया

RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि "जो हिंदू मुसलमानों को भारत में नहीं देखना चाहता, वह हिंदू नहीं है" पर ओवैसी ने तीखा रुख अपनाया, उन्होंने कहा कि भागवत का यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्रालय की धार्मिक स्वतंत्रता पर आई प्रतिकूल रिपोर्ट के बाद वैश्विक छवि सुधारने का एक छलावा मात्र है. संघ के वैचारिक संस्थापकों जैसे गोलवलकर और दीनदयाल उपाध्याय के लेखन का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि जब तक ज़मीनी स्तर पर नफ़रत और हिंसा को संघ का समर्थन मिलना बंद नहीं होता, तब तक ऐसे बयानों का कोई अर्थ नहीं है.

यूपी में गठबंधन और 'बी-टीम' के आरोपों का जवाब

कांग्रेस द्वारा AIMIM को अक्सर 'भाजपा की बी-टीम' कहे जाने पर ओवैसी ने कहा कि यह कांग्रेस की अपनी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की पुरानी आदत है, उन्होंने याद दिलाया कि 2014 और 2019 में जब भाजपा जीती, तब उनकी पार्टी ने कितनी सीटों पर चुनाव लड़ा था. 

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर ओवैसी ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को तीसरी बार सरकार बनाने से रोकना है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों को गठबंधन करने का खुला प्रस्ताव दिया था, ओवैसी के अनुसार, उन्होंने बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी धर्मनिरपेक्ष दलों को साथ मिलकर चुनाव लड़ने का अवसर दिया था, ताकि हिंदुत्व की राजनीति का मुकाबला किया जा सके.

Advertisement

हालांकि, ओवैसी ने खुलासा किया कि उनके इस प्रस्ताव पर न तो अखिलेश यादव की तरफ से और न ही कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई सकारात्मक जवाब मिला है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "चुनाव और गठबंधन में जबरदस्ती नहीं हो सकती, यह दोनों तरफ से होना चाहिए." सपा और कांग्रेस से कोई रिस्पॉन्स न मिलने के बावजूद ओवैसी ने स्पष्ट किया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे और संविधान द्वारा मिले अधिकार के तहत उत्तर प्रदेश में चुनाव जरूर लड़ेंगे.

इसके अलावा, बहुजन समाज पार्टी (BSP) या अन्य छोटी पार्टियों (जैसे PDM - पिछड़ा, दलित, मुस्लिम मोर्चा) के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि राजनीति में विकल्प हमेशा खुले रहते हैं और आने वाला समय ही तय करेगा कि वे किसके साथ मिलकर मैदान में उतरेंगे. 

अपने ऊपर लगने वाले 'सांप्रदायिक' होने के आरोपों को खारिज करते हुए ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी भारत के चुनाव आयोग (ECI) के नियमों और संविधान के दायरे में रहकर काम करती है, उन्होंने कहा कि भारत एक प्रतिनिधि लोकतंत्र है, जहां हर वर्ग और समुदाय को सत्ता के गलियारों, विधानसभाओं और संसद में अपनी आवाज उठाने का अधिकार है. जब कोई नेता अपने समाज के लिए राजनीतिक न्याय, शिक्षा, और विकास में हिस्सेदारी की मांग करता है, तो उसे 'गैर-धर्मनिरपेक्ष' या 'सांप्रदायिक' कहना पूरी तरह से गलत है. 

Advertisement

असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग SIR पर स्पष्ट किया कि वर्तमान में सरकार द्वारा लागू की जा रही नीतियां आम नागरिकों और विशेषकर मुस्लिम समुदाय के लिए गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक चुनौतियां पैदा कर रही हैं. जब ओवैसी से पूछा गया कि क्या 'जेन-जी' (Gen Z) या नया युवा वर्ग उनके और भाजपा के लिए परेशानी खड़ा करेगा, तो उन्होंने कहा कि वे और उनका समुदाय पहले से ही मस्जिदों के विध्वंस, फर्ज़ी मुकदमों और मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं. 

ओवैसी ने कहा कि उनकी जनसभाओं में 70 से 80 प्रतिशत युवा अपने आप आते हैं, ये युवा अब केवल 'वोट बैंक' बनकर नहीं रहना चाहते, वे भाजपा की राजनीति का मुकाबला करने के साथ-साथ अपने लिए एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और नेतृत्व  भी चाहते हैं.

'SIR' प्रक्रिया को बताया बैकडोर एनआरसी (NRC)

चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर तीखा हमला बोलते हुए ओवैसी ने इसे चोर रास्ते से लागू किया जाने वाला एनआरसी (NRC) करार दिया, उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के तहत लोगों से 2003 के पुराने रिकॉर्ड मांगे जा रहे हैं, जैसे उनके माता-पिता या दादा-दादी उस समय किस गांव, मकान या विधानसभा क्षेत्र में थे, ओवैसी ने कहा कि जिस देश में लोग अगली खुराक के भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हों, वहां 12-12 कागजात मांगना और उसके बाद भी ड्राफ्ट लिस्ट व नोटिस का डर बनाए रखना आम जनता का उत्पीड़न है.

Advertisement

असम एनआरसी और मानवीय संकट का उदाहरण

अपनी बात को सिद्ध करने के लिए ओवैसी ने असम एनआरसी का उदाहरण दिया, उन्होंने कहा कि 1,100 करोड़ रुपये खर्च करने और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी के बाद भी 19 लाख लोग एनआरसी से बाहर हो गए, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम और हिंदू शामिल थे, इसके बावजूद असम के मुख्यमंत्री और अधिक मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए फिर से एनआरसी कराने की बात कर रहे हैं. ओवैसी ने मुमताज बेगम के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों को बिना उचित प्रक्रिया के सीमा पार धकेला जा रहा है, जो कि मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) की नियुक्ति और आयोग की साख पर सवाल

विपक्ष द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर बात करते हुए ओवैसी ने याद दिलाया कि जब संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया से जुड़ा विधेयक लाया गया था, तब उन्होंने खुद इसका विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि इस तरीके से की गई नियुक्तियों से जनता की नजरों में चुनाव आयोग की निष्पक्षता खत्म हो जाएगी. हालिया खोजी खबरों का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि आज चुनाव आयोग की साख को गहरा धक्का लगा है. हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त पद से इस्तीफा नहीं देंगे, लेकिन असल जरूरत व्यक्ति बदलने की नहीं बल्कि इस जटिल और परेशान करने वाली SIR प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की है. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »