'संविधान की प्रस्तावना से सोशलिज्म और सेक्युलरिज्म शब्द हटाने का कोई इरादा नहीं', सरकार ने सदन में दिया जवाब

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिखित जवाब में कहा कि भले ही कुछ सार्वजनिक या राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर चर्चा या बहस हो रही हो, लेकिन सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव या निर्णय नहीं लिया गया है.

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कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव या निर्णय नहीं लिया गया है. (File Photo) कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव या निर्णय नहीं लिया गया है. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 6:56 AM IST

केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि संविधान की प्रस्तावना से 'समाजवाद' और 'धर्मनिरपेक्षता' शब्दों को हटाने या इन पर दोबारा विचार करने की वर्तमान में कोई योजना या मंशा नहीं है. ये दोनों शब्द आपातकाल के दौरान 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए जोड़े गए थे.

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लिखित जवाब में कहा कि भले ही कुछ सार्वजनिक या राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर चर्चा या बहस हो रही हो, लेकिन सरकार की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव या निर्णय नहीं लिया गया है.

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सरकार ने जवाब में क्या कहा?
 
उन्होंने कहा, 'सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि प्रस्तावना से 'समाजवाद' और 'धर्मनिरपेक्षता' शब्दों को हटाने या उन पर पुनर्विचार करने की फिलहाल कोई योजना या इरादा नहीं है. प्रस्तावना में संशोधन जैसे मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श और सर्वसम्मति की आवश्यकता होती है, लेकिन अभी तक इस दिशा में सरकार ने कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की है.'

कोर्ट ने भी खारिज कर दी थीं याचिकाएं
 
मेघवाल ने यह भी उल्लेख किया कि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था जिनमें 1976 के संशोधन को चुनौती दी गई थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार प्रस्तावना तक भी विस्तारित होता है.

अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय संदर्भ में 'समाजवाद' का अर्थ एक कल्याणकारी राज्य से है, जो निजी क्षेत्र के विकास में कोई बाधा नहीं बनता. वहीं 'धर्मनिरपेक्षता' संविधान की मूल संरचना का अभिन्न हिस्सा है.

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