तेलंगाना में गुरुवार को सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) के बीच भ्रष्टाचार और कर्ज के मुद्दे पर सार्वजनिक बहस को लेकर हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला. दोनों दलों के नेता एक-दूसरे को खुली बहस की चुनौती दे रहे थे, लेकिन पुलिस कार्रवाई के चलते यह बहस शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गई. कांग्रेस के मंत्री तेलंगाना शहीद स्मारक (गन पार्क) पहुंच गए, जबकि BRS नेताओं को रास्ते में ही रोक दिया गया.
विवाद की शुरुआत राज्य के समाज कल्याण आवासीय विद्यालयों के लिए टेंडर प्रोसेस में कथित 2,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से हुई. BRS नेता आरएस प्रवीण कुमार ने पहले यह आरोप लगाया था और अनुसूचित जाति विकास मंत्री अदलुरी लक्ष्मण कुमार सहित कांग्रेस नेताओं को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी थी.
इसके जवाब में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोनम प्रभाकर, एससी विकास मंत्री अदलुरी लक्ष्मण कुमार और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन तेलंगाना शहीद स्मारक पहुंचे. वहां मीडिया से बातचीत में पोनम प्रभाकर ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जिन टेंडरों की बात की जा रही है, उनकी कुल कीमत ही 2,000 करोड़ रुपये नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए BRS विधायकों के साथ बहस के लिए तैयार है, लेकिन अन्य लोगों के साथ नहीं.
उधर, BRS अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव के भतीजे और पार्टी विधायक टी. हरीश राव भी पार्टी मुख्यालय से शहीद स्मारक के लिए रवाना हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया. कार में बैठे हरीश राव ने दावा किया कि उन्होंने मंत्री पोनम प्रभाकर, लक्ष्मण कुमार और अजहरुद्दीन को फोन कर पुलिस को रास्ता देने के लिए कहने का अनुरोध किया, लेकिन किसी मंत्री ने उनका फोन नहीं उठाया.
BRS कार्यकर्ताओं की नारेबाजी के बीच हरीश राव ने पैदल शहीद स्मारक जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया. बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं की है तो फिर पुलिस के जरिए उन्हें बहस के लिए जाने से क्यों रोका गया.
इसी दौरान राज्य के आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव भी शहीद स्मारक पहुंचे. उन्होंने BRS के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (KTR) को BRS शासनकाल में लिए गए कर्ज पर सार्वजनिक बहस की चुनौती दी. कृष्णा राव ने KTR के इस दावे को खारिज किया कि BRS सरकार ने केवल 2.80 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. उन्होंने कहा कि BRS सरकार के कार्यकाल में कुल कर्ज करीब 8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था.
दूसरी ओर KTR ने दावा किया कि वह BRS मुख्यालय में तीन घंटे से अधिक समय तक मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव का इंतजार करते रहे. उन्होंने कहा कि मंत्री के स्वागत के लिए पार्टी कार्यालय में विशेष कुर्सी और शॉल तक की व्यवस्था की गई थी, लेकिन वह नहीं पहुंचे. KTR ने यह भी आरोप लगाया कि जब वह पैदल गन पार्क जाने लगे तो पुलिस ने उन्हें पार्टी कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही रोक दिया.
KTR ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से मांग की कि यदि सरकार में हिम्मत है तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सभी मुद्दों पर खुली चर्चा कराई जाए.
दरअसल, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 30 जून को किसानों के लिए 'रैतु बंधु' योजना के तहत धनराशि जारी करने के कार्यक्रम में कहा था कि वह कांग्रेस सरकार के पिछले 30 महीनों के कामकाज, BRS के 10 साल के शासन और केंद्र में NDA सरकार के 12 साल के कार्यकाल पर सार्वजनिक बहस के लिए तैयार हैं.
वहीं मंत्री पोनम प्रभाकर ने बाद में जारी बयान में कहा कि उन्होंने हरीश राव को शहीद स्मारक आने का निमंत्रण नहीं दिया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मंत्री काफी देर तक वहां इंतजार करते रहे, लेकिन BRS का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा. उन्होंने यह दावा भी खारिज किया कि उन्होंने हरीश राव के फोन नहीं उठाए. प्रभाकर के मुताबिक वह उस समय सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त थे और हरीश राव राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं.
इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने भी निशाना साधा. उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि कांग्रेस और BRS का यह टकराव किसी 'बिग बॉस' रियलिटी शो जैसा लग रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दल कैमरों के सामने लड़ते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे को बचाते हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा दोनों दलों को गुरुकुल टेंडर, राज्य के बढ़ते कर्ज, भ्रष्टाचार और सुशासन के मुद्दों पर तथ्यों के साथ बेनकाब करेगी.
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