निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक अगस्त को कोलकाता आने पर वामपंथी नेताओं द्वारा लगाए जा रहे BJP-RSS समर्थक होने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि ये आरोप पूरी तरह झूठे और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं. उन्हें स्पष्ट किया कि वह कोलकाता दौरा किसी राजनीतिक दल के बुलावे पर नहीं जा रहीं, बल्कि उन्हें सेक्युलर मिशन नामक संस्था ने उन्हें आमंत्रित किया है.
नसरीन ने अपने आगामी कोलकाता दौरे को लेकर हो रही आलोचना का जवाब देते हुए एक्स पर बताया कि वह कोलकाता किसी राजनीतिक दल के बुलावे में नहीं आ रही हैं, बल्कि उन्हें 'सेक्युलर मिशन' ने आमंत्रित किया है.
सुरक्षा देना प्रशासनिक जिम्मेदारी
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें न तो बीजेपी कोलकाता ले जा रही है और न ही पश्चिम बंगाल की वर्तमान सरकार. राज्य सरकार की भूमिका केवल उन्हें सुरक्षा प्रदान करने तक सीमित है जो किसी भी सार्वजनिक हस्ती की यात्रा के दौरान दी जाने वाली एक सामान्य और नियमित प्रशासनिक जिम्मेदारी होती है.
तब क्यों चुप थे कोलकाता के नेता
तसलीमा ने अपने केरल दौरों का जिक्र करते हुए वामपंथी नेताओं के दोहरे रवैये पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि वह सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाली केरल सरकार के निमंत्रण पर कई बार वहां जा चुकी हैं, जहां वामपंथी नेताओं ने उनका स्वागत किया, सम्मान दिया और जेड-प्लस (Z+) सुरक्षा भी दी. उन्होंने पूछा कि तब चुप रहने वाले कोलकाता के नेता अब उनके खिलाफ क्यों बोल रहे हैं.
बांग्लादेशी लेखिका ने आरोप लगाया कि वाममोर्चा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) दोनों में से किसी भी सरकार ने उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बचाव नहीं किया. वाममोर्चा सरकार ने उन्हें कोलकाता से बाहर निकाला और बाद में आई तृणमूल सरकार ने भी उन्हें पश्चिम बंगाल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी. इतना ही नहीं, उसने मेरे द्वारा लिखे गए लंबे समय से चल रहे एक सीरियल के प्रसारण को रोक दिया और मेरे बुक लॉन्च को रद्द किया गया था.
उन्होंने कहा, 'क्या बंगाल के तथाकथित प्रगतिशील लोगों ने तब अभिव्यक्ति की आज़ादी के समर्थन में एक शब्द भी कहा था? नहीं, उन्होंने ऐसा नहीं किया.'
2007 में छोड़ा था कोलकाता
तसलीमा नसरीन साल 2007 के बाद पहली बार एक अगस्त को रवींद्र सदन में आयोजित होने वाले एक कट्टरवाद-विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कोलकाता लौट रही हैं. वह 2004 से 2007 तक कोलकाता में रही थीं, लेकिन उनकी आत्मकथा 'द्विखंडितो' पर विवाद और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था और उन्हें राज्य छोड़ना पड़ा था. उनकी इस किताब पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था.
बांग्लादेश में इस्लाम के अपमान के आरोपों का सामना करने के बाद निर्वासित तसलीमा नसरीन वर्तमान में लंबे वक्त के रेजिडेंस परमिट पर दिल्ली में रह रही हैं.एक अगस्त के इस कार्यक्रम का आयोजन तीन संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है, जिसमें वह कविता पाठ और नागरिक अभिनंदन में भाग लेंगी. इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता और प्रसिद्ध लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के शामिल होने की उम्मीद है.
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