भ्रष्टाचार के खिलाफ विजय सरकार ने खोला मोर्चा, चेन्नई निगम के 6 अधिकारी सस्पेंड

तमिलनाडु की TVK सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है. ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के छह अधिकारियों को रिश्वत, फर्जी बिल और कैश-फॉर-जॉब्स जैसे मामलों में सस्पेंड किया गया है. सरकार अब इन्हें सेवा से बर्खास्त करने पर भी विचार कर रही है.

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भ्रष्टाचार के खिलाफ विजय सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. (Photo: PTI) भ्रष्टाचार के खिलाफ विजय सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. (Photo: PTI)

अनघा

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

तमिलनाडु में विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है. ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (GCC) में रिश्वतखोरी और वित्तीय मामलों में गड़बड़ी के आरोपों में छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि सिर्फ सस्पेंशन तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने पर इन अधिकारियों को नौकरी से भी बर्खास्त किया जा सकता है. कई अधिकारी 20 साल से भी ज्यादा समय से सेवा में हैं.

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ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के आयुक्त समीरन ने आजतक से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री विजय ने भ्रष्टाचार के मामलों में "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि निलंबन सिर्फ शुरुआती विभागीय कार्रवाई है. जांच पूरी होने के बाद तय किया जाएगा कि संबंधित अधिकारियों को सेवा से हटाया जाए या VRS का विकल्प दिया जाए. साथ ही कई मामलों में आपराधिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.

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जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, उनमें सहायक कार्यपालक इंजीनियर आनंदराव शामिल हैं. उन्हें 17 जून को एक भवन मालिक से प्लानिंग परमिशन देने के बदले 2.5 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित किया गया. मेडिकल ऑफिसर डॉ. देविकला को 9 जुलाई को वर्ष 2025-26 के दौरान मेडिकल एक्वीपमेंट्स की खरीद में 9 लाख रुपये के फर्जी बिल पेश करने के आरोप में सस्पेंड किया गया.

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11 जुलाई को वरिष्ठ एंटोमोलॉजिस्ट शिवा पोरकोडी को कथित कैश-फॉर-जॉब्स घोटाले में भूमिका निभाने के आरोप में निलंबित किया गया. आरोप है कि उन्होंने अपने पति जयप्रकाश के साथ मिलकर नौकरी दिलाने के नाम पर 6 लाख रुपये लिए. इस मामले में दोनों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया गया है.

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इसके अलावा रोड वर्कर भास्कर को 10 जुलाई को एक भवन मालिक से लॉक-एंड-सील की धमकी देकर 50 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित किया गया. वहीं, 15 जुलाई को मैकेनिकल विभाग के ठेकेदार से लंबित बिल पास कराने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में दुर्गा और उनके पति कन्नन को भी सस्पेंड कर दिया गया.

GCC का कहना है कि अब भ्रष्टाचार के मामलों में सिर्फ विभागीय कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि दोषियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे भी चलाए जाएंगे. 

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