पैकेज पर चेतावनी लेबल लगाने से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि FSSAI की तरफ से अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की कोई परिभाषा नहीं है. उन्होंने कहा कि FSSAI ने लेबलिंग लागू करने की बात कही है.
जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला ने कहा कि कोर्ट ने FSSAI की ओर से किए गए कामों की सराहना की है, लेकिन जिस लक्ष्य को हासिल करना है, उसके लिए अभी और काम किए जाने की जरूरत है.
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से पूछा कि वह 'एडेड शुगर' को किस तरह परिभाषित कर रहा है. FSSAI की ओर से ASG ने कहा कि कुछ खाद्य पदार्थ जैसे नट्स और कुछ फल पहले से ही शुगर में ज्यादा होते हैं. ऐसे में यह बताना जरूरी है कि इनमें पहले से शुगर की मात्रा ज्यादा है और कुछ उत्पादों में एडेड शुगर भी हो सकती है.
सुनवाई के बाद होगा फैसला
जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला ने कहा कि कोर्ट सभी पक्षों को सुन रहा है और इसके बाद आदेश पारित करेगा. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लोगों और देश के हित में की जा रही है और उम्मीद है कि सभी अथॉरिटीज कोर्ट के आदेश को सही भावना से स्वीकार करेंगी.
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से पैकेज पर चेतावनी लेबल लागू करने की समय सीमा और स्वैच्छिक तौर पर इसे लागू करने को लेकर सवाल किया. कोर्ट ने पूछा कि इतनी लंबी समय सीमा क्यों चाहिए और आपत्तियों के लिए और समय क्यों दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई थी, फिर और समय की जरूरत क्यों है. FSSAI की ओर से ASG ने कहा कि शुरुआत स्टार रेटिंग सिस्टम से हुई थी, जबकि अब यार्डस्टिक अलग है. उन्होंने नियम तैयार करने के लिए 4 महीने का समय मांगा और कहा कि लागू करने की समय सीमा कोर्ट तय कर सकता है.
सभी के सहयोग की जरूरत
सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने कुछ चिंताओं का जिक्र किया और अंतरराष्ट्रीय नियमों को देखने की बात कही. उन्होंने अमेरिका, कनाडा और यूरोप के नियमों का हवाला देते हुए प्रति सर्व के आधार पर जानकारी देने के पहलू पर विचार करने की बात कही. जस्टिस चंद्रन ने कहा कि अमेरिका एडेड शुगर के मुद्दे से जूझ रहा है. इस पर कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों को सहयोग करना होगा.
सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज पर चेतावनी लेबल के मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया. कोर्ट ने सभी पक्षों को एक सप्ताह के भीतर संक्षिप्त लिखित दलीलें दाखिल करने की अनुमति दी है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैकेज के फ्रंट पर लेबल लगाने के मुद्दे पर विस्तृत निर्देश दिए जाएंगे. जस्टिस पार्डीवाला ने कहा कि कोर्ट आदेश पारित करेगा और कुछ समय बाद अनुपालन के लिए इसे रखा जाएगा. उन्होंने सभी अथॉरिटीज से कोर्ट के निर्देशों का पालन करने की उम्मीद जताई.
अनीषा माथुर