दिवाली के बाद SC में ग्रीन क्रैकर्स पर होगी सुनवाई, पटाखों पर बैन की मांग

प्रदूषण के कारण पटाखों और आतिशबाजी पर पाबंदी की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई आगे के लिए टाल दी. बेरियम पर सुनवाई दिवाली बाद होगी, जबकि याचिकाकर्ताओं ने बिक्री और पहचान पर सवाल उठाए और निर्माताओं ने सख्त नियम लागू करने की मांग की.

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पटाखों में बेरियम की मात्रा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. (सांकेतिक तस्वीर) पटाखों में बेरियम की मात्रा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है. (सांकेतिक तस्वीर)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

प्रदूषण के चलते पटाखों और आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई अगले हफ्ते तक टाल दी. पटाखों में बेरियम की मात्रा कितनी होनी चाहिए, इस मुद्दे पर अब दिवाली के बाद सुनवाई हो सकती है.

याचिकाकर्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सरकार विचार-विमर्श के लिए दो हफ्ते का समय मांग रही है, जबकि पटाखों की बिक्री, ढुलाई और डिलीवरी जारी है. याचिकाकर्ता अर्जुन गोपाल की वकील उत्तरा बब्बर ने कहा कि बाजार में ग्रीन क्रैकर्स के नाम पर भ्रामक लेबल वाले पटाखे बेचे जा रहे हैं. इनकी असलियत जांचने के लिए प्रभावी व्यवस्था या काम करने वाला QR कोड नहीं है.

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पटाखों सेहत के लिए कितना खतरनाक?

एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि पटाखों से निकलने वाले PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण फेफड़ों में पहुंचकर खून के जरिए शरीर में फैल सकते हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली के डॉक्टर अब 14 से 16 साल के ऐसे बच्चों के फेफड़ों में भी काले धब्बे देख रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया. उन्होंने दिवाली के बाद अस्पतालों में सांस और गर्भावस्था से जुड़ी समस्याएं बढ़ने का भी जिक्र किया.

अपराजिता सिंह ने कहा कि ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त नहीं हैं. CSIR और NEERI के फॉर्मूले के मुताबिक, इनमें सामान्य पटाखों के मुकाबले उत्सर्जन करीब 30 फीसदी कम होता है, लेकिन इनसे भी प्रदूषण फैलता है. उन्होंने कहा कि जब प्रदूषण गंभीर होने पर निर्माण कार्य रोकने और स्कूलों को ऑनलाइन करने जैसे कदम उठाए जाते हैं, तो ऐसे में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

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निर्माताओं ने पूर्ण प्रतिबंध का किया विरोध

पटाखा निर्माताओं के वकील जे. साई दीपक ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध कारगर नहीं होता और इससे काले बाजार, चीनी उत्पादों तथा बिना लाइसेंस वाले पटाखों की बिक्री बढ़ती है. उन्होंने कहा कि नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए, लेकिन नियमों का पालन करने वाले निर्माताओं को भी दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए.

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दिल्ली सरकार की ओर से एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार तैयार है. एक नवंबर से लागू होने वाली योजना के तहत BS6 मानक से नीचे के बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक, सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव और निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन जैसे कदम उठाए गए हैं. उन्होंने बताया कि 608 एंटी-स्मॉग गन तैनात की गई हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हर साल उसके आदेशों का उल्लंघन होता है. अदालत ने नई पीढ़ी से प्रदूषण की गंभीर समस्या के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत पर भी जोर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा

दिवाली पर दिल्ली-NCR में पटाखों पर बैन जारी रहेगा या सशर्त छूट मिलेगी, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्न बी वराले की पीठ ने कहा कि प्रदूषण से निपटने के लिए सभी को उच्च स्तर पर काम करना होगा. कोर्ट ने कहा कि हर साल आदेश जारी किए जाते हैं, लेकिन अब यह उसके लिए भी अकादमिक विषय बनकर रह गया है और आदेशों का उल्लंघन ज्यादा होता है. ऐसे में कुछ नया और इनोवेटिव तरीका आजमाने की जरूरत है. कोर्ट ने खास तौर पर नई पीढ़ी को जागरूक करने पर जोर दिया और कहा कि विराट कोहली जैसी प्रभावशाली हस्तियों को प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान में शामिल किया जाना चाहिए.

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