भारत की राजनीति बदलने के लिए सोनम वांगचुक की 'शांतिपूर्ण क्रांति' की मांग

सोनम वांगचुक ने देश में शांतिपूर्ण क्रांति की अपील की है. उन्होंने कहा कि 50 साल पहले जो पड़ोसी देश हमसे पीछे या हमारे बराबर थे, वे आज हमसे आगे निकल गए हैं.

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सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. (Photo: ITG) सोनम वांगचुक ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

क्लाइमेट एक्टिविस्ट और एजुकेशन रिफॉर्मर सोनम वागंचुक ने भारत में शांतिपूर्ण क्रांति की अपील की है. उनका तर्क है कि अगर देश को सम्मानजनक राष्ट्र बने रहना है और 2047 तक एक विकसित देश के रूप में उभरना है, तो उसे अपने राजनीतिक नेताओं को चुनने के तरीके में बुनियादी बदलाव की जरूरत है.

स्वतंत्रता दिवस से पहले पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने भारत के दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन का आह्वान किया और नागरिकों से ऐसे निस्वार्थ, निडर और अच्छे चरित्र वाले लोगों का सुझाव देने को कहा जो देश के भविष्य को आकार देने में मदद कर सकें.

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वांगचुक ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और उन्होंने भारत, इसकी प्रगति और इसके भविष्य के बारे में सोचने में समय बिताया.

उन्होंने कहा, पचास साल पहले, जो पड़ोसी देश हमसे पीछे थे या हमारे बराबर थे, वे अब हमसे बहुत आगे निकल गए हैं. उन्होंने प्रति व्यक्ति जीडीपी का जिक्र करते हुए थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश का नाम लिया.

वांगचुक ने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे, तो भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ तक विकसित देश नहीं बन पाएगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी जगह बनाए रखने के लिए संघर्ष कर सकता है. उन्होंने कहा कि अगर भारत 2047 तक सम्मानजनक राष्ट्र बने रहना चाहता है, तो उसे बड़े बदलाव की जरूरत है.

वांगचुक ने उन लोगों को बधाई दी जिन्होंने पिछले दो महीनों में बदलाव की मांग की और विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में भी बदलाव हुआ, उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का जिक्र किया.

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उन्होंने कहा, मैं एक तरफ तो आपको बधाई देना चाहता हूं कि आपने बदलाव चाहा और पिछले दो महीनों में विरोध प्रदर्शन किया. भले ही बदलाव हुआ, शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे दिया. लेकिन अगले शिक्षा मंत्री से भी मुझे किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं है. उन्होंने कहा, जब तक शिक्षा पीछे रहेगी, देश का भविष्य भी पीछे रहेगा.

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