बीजेपी के जाने-माने चेहरे और राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक बार फिर पार्टी छोड़ने के फैसले के साथ चिट्ठी लिखी है. उन्होंने सोमवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को अपनी चिट्ठी भेजकर राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद और पार्टी की सक्रिय प्राथमिक सदस्यता से मुक्त करने की मांग की.
शहजाद पूनावाला ने अपनी चिट्ठी को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है. इससे पहले 30 जुलाई को उन्होंने बीजेपी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे की पेशकश की थी. उनका कहना है कि पार्टी ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था और उन्हें फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था.
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आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का दिया हवाला
शहजाद पूनावाला ने अपनी नई चिट्ठी में इस्तीफे के पीछे मुख्य तौर पर आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों का हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के चलते वह अब अपने फैसले पर कायम हैं. पूनावाला ने लिखा कि लंबे विचार-विमर्श और गंभीरता से सोचने के बाद उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद और पार्टी की सक्रिय प्राथमिक सदस्यता से अलग होने का अंतिम फैसला लिया है.
पूनावाला ने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं और कुछ लोगों से जुड़ी परिस्थितियों ने उनके पहले लिए गए फैसले को और मजबूत किया है. हालांकि, चिट्ठी में उन्होंने इन लोगों के नाम या घटनाओं की विस्तार से जानकारी नहीं दी है.
पार्टी ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था
शहजाद पूनावाला ने अपनी चिट्ठी में कहा कि जब पार्टी ने उनका पिछला इस्तीफा तुरंत स्वीकार नहीं किया और उन्हें फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा, तो यह उनके लिए भावुक और सम्मान देने वाला अनुभव था. उन्होंने पार्टी के इस रुख के लिए आभार भी जताया.
पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का भी आभार जताया. उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में पार्टी ने उन्हें मंच और कई अवसर दिए, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे.
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पार्टी छोड़ेंगे, विचारधारा नहीं
शहजाद पूनावाला ने साफ किया कि पार्टी से अलग होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के काम और विचारों के प्रति उनका समर्थन जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण वह निजी क्षेत्र में जाने की योजना बना रहे हैं. अपनी चिट्ठी के आखिर में पूनावाला ने लिखा कि वह "व्यवस्था छोड़ रहे हैं, व्यक्ति या विचार नहीं."
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