'E20 पेट्रोल वापस लें'... वैज्ञानिकों का सरकार को पत्र, उठाईं तीन मांग

'इंडिया मार्च फॉर साइंस' के दौरान वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सरकार से e20 रोलआउट को वापस लेेने की मांग की है. साथ ही, उन्होंने NTA को खत्म करने और काला जादू विरोधी कानून बनाने की भी मांग की है.

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वैज्ञानिकों ने की E20 रोलआउट वापस लेने की मांग (Photo: ITG) वैज्ञानिकों ने की E20 रोलआउट वापस लेने की मांग (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

मशहूर वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सरकार से E20 इंधन के रोलआउट को रोकने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को समाप्त करने और देश भर में काला जादू विरोधी कानून बनाने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकारी नीतियां वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित होनी चाहिए.

मुंबई में शनिवार को 'इंडिया मार्च फॉर साइंस' के दौरान एक जॉइंट अपील जारी करते हुए हस्ताक्षर कर्ताओं ने छद्म विज्ञान को बढ़ावा देने, सबूतों को दरकिनार करने वाली सरकारी नीतियों और शिक्षा और रिसर्च में घटते सरकारी निवेश पर चिंता जताई है. इस अपील पर कई वैज्ञानिकों और कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं.

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इसमें CEBS, मुंबई के पद्म भूषण मुंबई के पद्म भूषण पुरस्कार विजेता प्रो. एम. एस. रघुनाथन; SSB पुरस्कार विजेता और 'ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी' के अध्यक्ष प्रो. एस. जी. दानी; HBCSE-TIFR के प्रो. अनिकेत सुले; मुंबई यूनिवर्सिटी और पूर्व TIFR के प्रो. बी. एम. अरोड़ा; पूर्व TIFR के डॉ. एन. कृष्णन; और मुंबई प्रेस क्लब के सचिव अनिल कुमार सिंह शामिल हैं.

बता दें, 2017 में दुनिया के लगभग 600 शहरों में 'इंडिया मार्च फॉर साइंस' की शुरुआत हुई थी. इसके भारतीय चैप्टर सबूत-आधारित नीति-निर्माण और रिसर्च के लिए अधिक फंडिंग की वकालत करने के लिए देश भर में सालाना रैलियां आयोजित करते हैं. इस समूह ने E20 फ्यूल पॉलिसी को तुरंत रोकने की मांग करते हुए लाइफ-साइकिल एनवायरनमेंटल असेसमेंट और सहायक बुनियादी ढांचे की कमी का हवाला दिया है. 

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विपक्षी पार्टियों ने भी किया था E20 का विरोध

इससे पहले भी विपक्षी पार्टियों खासकर आम आदमी पार्टी और शिवसेना (UBT) ने सरकार के  E20 फ्यूल पॉलिसी की आलोचना की है. इस समूह की अपील में हाल ही में हुए पेपर लीक और देश भर में NEET के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन का भी हवाला दिया गया. और NTA को खत्म करने के साथ ही परीक्षा प्रणाली में बदलाव करने की मांग की है.  इसके साथ ही, वैज्ञानिकों ने पिघलते ग्लेशियर, समुद्र के बढ़ते जलस्तर, इकोसिस्टम के खत्म होने और प्रजातियों के तेजी से विलुप्त होने पर चिंता जताई है. 

शिक्षा के लिए आवंटित हो बजट

वैज्ञानिकों की मांग है कि केंद्रीय बजट से कम से कम 10% और राज्य बजट से कम से कम 30% हिस्सा शिक्षा के लिए आवंटित किया जाए. इसके साथ ही, रिसर्च पर होने वाले कुल खर्च को GDP के मौजूदा 0.7 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 3 प्रतिशत करने की भी मांग की गई.

आयोजकों ने  "विज्ञान अपनाएं, भविष्य सुरक्षित करें" के नारे के तहत वैज्ञानिकों, शिक्षकों, छात्रों और नागरिकों से वैज्ञानिक पद्धति और तार्किक सोच को अपनाने का आग्रह किया, ताकि भारत के सामूहिक भविष्य को सुरक्षित किया जा सके.

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