टीएमसी का दावा- SIR से बंगाल के नतीजों पर असर, सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये जवाब

सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर मुद्दे पर सुनवाई के दौरान टीएमसी ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का असर बंगाल के चुनाव परिणामों पर पड़ा और कई सीटों पर हार-जीत प्रभावित हुई.

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सुप्रीम कोर्ट एसआईआर प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. (Photo: ITG) सुप्रीम कोर्ट एसआईआर प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. (Photo: ITG)

सृष्टि ओझा / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:37 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य याचिकाकर्ता विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण विधानसभा चुनाव परिणाम प्रभावित होने के दावों को लेकर नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. 

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इस दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश हुए लोकसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत से कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का असर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों पर पड़ा है. कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से कम था, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए. 

उन्होंने एक सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां उनकी पार्टी का उम्मीदवार सिर्फ 862 वोटों से हारा, जबकि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उस निर्वाचन क्षेत्र से 5000 से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे. कल्याण बनर्जी ने यह भी दलील दी कि राज्य में टीएमसी और बीजेपी के बीच कुल वोटों का अंतर लगभग 32 लाख था, जबकि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों के खिलाफ दायर अपीलों की संख्या 35 लाख से ज्यादा है. कल्याण बनर्जी ने कहा कि इन अपीलों के निपटारे में कई साल लग सकते हैं, जिससे गंभीर चिंता पैदा होती है.

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संबंधित पक्ष नई याचिका दायर करने को स्वतंत्र: SC

इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में जीत का अंतर मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या से कम है, तो संबंधित पक्ष नई याचिका दायर कर सकते हैं. अदालत ने पिछली सुनवाई में भी संकेत दिया था कि ऐसे मामलों की जांच की जाएगी, जहां जीत-हार का अंतर एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से डिलीट हुए नामों की संख्या से कम हो. टीएमसी की राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि मौजूदा रफ्तार से मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़ी अपीलों के निपटारे में अपीलेट ट्रिब्यूनल्स को करीब चार साल लग सकते हैं. 

जिन्हें नतीजों से शक वे दायर करें चुनाव याचिका: EC

वहीं, निर्वाचन आयोग ने टीएमसी की इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी उपाय इलेक्शन पिटीशन (चुनाव याचिका) के जरिए उपलब्ध है. निर्वाचन आयोग की ओर से पेश अधिवक्ता डीएस नायडू ने अदालत से कहा कि चुनाव संबंधी विवादों पर कानून स्पष्ट है और एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े हर मुद्दे पर अलग-अलग मुकदमे नहीं चलाए जा सकते. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलों के निपटारे की व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकता है और मामलों का समय पर समाधान बेहद जरूरी है.

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए ​मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है. 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले गए और नतीजे 4 मई को घोषित हुए. बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि टीएमसी को 80 सीटें मिलीं. राज्य में मतदान प्रतिशत 90 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया था.

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