सबरीमाला गोल्ड केस: पूर्व TDB चीफ के खिलाफ मिले सबूत, HC ने नए क्रिमिनल केस की दी मंजूरी

सबरीमाला मंदिर में कथित सोने के नुकसान की जांच अब और तेज हो गई है. केरल हाई कोर्ट ने SIT को नया क्रिमिनल केस दर्ज करने की मंजूरी दे दी है. जांच में TDB के पूर्व प्रेसिडेंट पी एस प्रशांत समेत कई लोगों की भूमिका को लेकर सबूत मिलने का दावा किया गया है.

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हाई कोर्ट ने SIT को नया क्रिमिनल केस दर्ज करने की दी इजाजत, पूर्व बोर्ड अध्यक्ष पर शिकंजा. (File Photo: ITG) हाई कोर्ट ने SIT को नया क्रिमिनल केस दर्ज करने की दी इजाजत, पूर्व बोर्ड अध्यक्ष पर शिकंजा. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • तिरुवनंतपुरम,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:59 PM IST

सबरीमाला मंदिर के गोल्ड लॉस केस में बड़ा अपडेट सामने आया है. केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT को नया क्रिमिनल केस दर्ज करने की इजाजत दे दी. कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान TDB के पूर्व प्रेसिडेंट पी एस प्रशांत के खिलाफ साल 2025 में द्वारपालक की मूर्तियों की दोबारा गोल्ड प्लेटिंग से जुड़े सबूत मिले हैं.

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जस्टिस राजा विजयराघवन वी और जस्टिस के वी जयकुमार की डिवीजन बेंच ने कहा कि SIT के पास दो विकल्प हैं. वो साल 2025 की रीप्लेटिंग से जुड़े मामले में नया केस दर्ज कर सकती है या फिर साल 2019 में गोल्ड प्लेटिंग के दौरान कथित सोने के नुकसान की चल रही जांच में अपनी रिपोर्ट और निष्कर्ष शामिल कर सकती है.

हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित SIT सबरीमाला मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों और श्रीकोविल यानी पवित्र स्थान के सोने की परत चढ़े दरवाजों से कथित तौर पर सोना गायब होने के मामलों की जांच कर रही है. इन दोनों मामलों में साल 2019 में मूर्तियों और दरवाजों की गोल्ड प्लेटिंग हटाकर उन्हें दोबारा काम के लिए चेन्नई भेजा गया था.

जांच अधिकारी एस शशिधरन ने कोर्ट के सामने डिटेल्ड स्टेटस रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट में दावा किया गया कि जांच के दौरान ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कथित साजिश सिर्फ मुख्य आरोपियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि TDB के कुछ अन्य अधिकारियों और सदस्यों तक भी इसका कनेक्शन पहुंचता है.

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SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, सोने से ढकी द्वारपालक मूर्तियां साल 1998 में गोल्ड प्लेटेड की गई थीं. इन्हें साल 2019 में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के कहने पर चेन्नई ले जाया गया. आरोप लगाया गया कि चेन्नई में दोबारा गोल्ड प्लेटिंग की प्रक्रिया के दौरान पुरानी असली सोने की परत हटा दी गई. नई प्लेटिंग के लिए बहुत कम सोने लगाए गए.

बाकी सोने के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया गया. रिपोर्ट में यह भी आरोप है कि काम की गुणवत्ता खराब होने के बावजूद शक से बचने के लिए गोल्ड प्लेटिंग के लिए 40 साल की वारंटी वाला सर्टिफिकेट जारी किया गया. हालांकि कुछ महीनों बाद ही प्लेटिंग खराब होने लगी और नीचे की कॉपर की सतह दिखाई देने लगी.

SIT के मुताबिक, साल 2019 में हुई हेराफेरी को छिपाने के लिए साल 2025 में नई गोल्ड प्लेटिंग के नाम पर मूर्तियों को दोबारा चेन्नई ले जाने की एक और क्रिमिनल साजिश रची गई. नवंबर 2023 में पी एस प्रशांत के TDB प्रेसिडेंट बनने के बाद उन्नीकृष्णन पोट्टी ने उनका भरोसा हासिल किया. उन्हें नई रीप्लेटिंग के प्रस्ताव के लिए तैयार किया.

SIT का दावा है कि बोर्ड के कुछ सदस्यों ने द्वारपालक मूर्तियों को फिर से भेजने के फैसले में मदद की, जबकि उन्हें पता था कि यह देवस्वम मैनुअल और हाई कोर्ट के पहले के निर्देशों के खिलाफ था. जांच टीम ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों और सदस्यों को जानकारी थी कि पोट्टी के पास 2019 में मूर्तियों से निकाले गए सोने की बाकी मात्रा मौजूद थी. 

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इसके बावजूद कार्रवाई करने के बजाय चोरी और हेराफेरी को छिपाने के लिए मिलीभगत की गई. SIT ने कहा कि उसने एग्जीक्यूटिव ऑफिसर मुरारी बाबू, स्पॉन्सर उन्नीकृष्णन पोट्टी, स्मार्ट क्रिएशन्स के मालिक पंकज भंडारी, TDB के पूर्व प्रेसिडेंट पी एस प्रशांत, बोर्ड मेंबर ए अजीकुमार, कंदारारू राजीवारू और रेजिलाल से जुड़े कई अहम सबूत जुटाए हैं.

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