लोकसभा में भारी हंगामे और बहस के बीच एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है. बिल पास होने के कुछ ही घंटे बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर जनता और छात्रों के मुद्दे उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सदन के भीतर उन्हें बोलने नहीं दिया गया. राहुल गांधी का कहना था कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुई बर्बरता का मुद्दा उठाना चाहते थे.
इस दौरान, राहुल गांधी ने दावा किया कि उन्होंने 25 जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह को इस मामले में चिट्ठी लिखी थी. उनका कहना था कि गृह मंत्री को दिल्ली पुलिस की ओर से लगातार ब्रीफिंग दी जा रही थी और उन्होंने खुद अमित शाह को पुलिस अधिकारियों से बात करते देखा था. उनका कहाना है कि कि इस मामले में सिर्फ दो ही संभावनाएं हैं- या तो गृह मंत्री को कार्रवाई की जानकारी थी, या फिर उन्हें कुछ पता नहीं था. उन्होंने कहा कि दोनों ही स्थितियों में जवाबदेही तय होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को अमित शाह को पद से हटाना चाहिए.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने पांच तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि संसद से महज 500 मीटर दूर छात्रों पर बर्बरता हुई. उनका आरोप था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया और कील लगी लाठियों से हमला किया गया. उन्होंने कहा कि उन्होंने एम्स के मेडिकल सर्टिफिकेट भी देखे हैं, जिनसे घायल छात्रों की स्थिति का पता चलता है. राहुल गांधी ने कहा कि वह यही मुद्दा लोकसभा में उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला.
'माफी नहीं मांगूंगा'
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उनसे कहा गया था कि अगर वह माफी मांग लें तो उन्हें सदन में बोलने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि वह सच बोलने के लिए कभी माफी नहीं मांगेंगे. उनका कहना था कि विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा है और जिन लोगों ने पैलेट गन चलाई या बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
सरकार ने दावों को बताया गलत
इससे पहले लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सरकार की ओर से जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया. उनका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान कहीं भी गोली या पैलेट गन नहीं चली, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. उन्होंने विपक्ष के आरोपों को तथ्यहीन बताया और कहा कि बिना पुष्टि के ऐसे दावे करना उचित नहीं है.
जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि 2024 में कानून लागू होने के बाद सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है. उनके मुताबिक, पिछले दो वर्षों में इस कानून के तहत 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं. इनमें 29 मामले Prevention of Unfair Means Act के तहत, जबकि 23 मामले भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज हुए हैं. उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि सरकार पेपर लीक के मामलों में कार्रवाई कर रही है.
लोकसभा से बिल पास होने के साथ ही इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज हो गया है. राहुल गांधी ने छात्रों के साथ हुई बर्बरता को लेकर सरकार से जवाब मांगा है, जबकि सरकार उनके आरोपों को लगातार खारिज कर रही है. ऐसे में अब इस पूरे विवाद पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी.
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