मध्य प्रदेश के इंदौर में शनिवार को 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम हुआ. छात्रों से बात करते हुए राहुल गांधी ने सवाल पूछने की आदत, शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती और देश की संस्थाओं के कामकाज पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि 'सिस्टम को स्टूडेंट नहीं, अंधभक्त चाहिए'. राहुल गांधी का कहना था कि छात्र जिज्ञासु होता है, वह सवाल करता है, वजह जानना चाहता है. इसी वजह से वह सिस्टम से जवाब मांगता है.
राहुल गांधी ने कहा कि छात्र किसी बात को सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं करता कि उसे ऊपर से ऐसा बता दिया गया है. वह पूछता है कि किसी व्यक्ति को किसी बड़ी संस्था की जिम्मेदारी कैसे मिल गई. इसी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह के बेटे का जिक्र किया. उन्होंने सवाल किया कि वह क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन कैसे बने. राहुल गांधी ने इसे मेरिट और योग्यता के सवाल से जोड़ते हुए कहा कि छात्रों को ऐसे मामलों पर सवाल पूछना चाहिए.
भाषण में देश के बड़े कारोबार, न्यायपालिका, चुनाव आयोग और दूसरी संस्थाओं का भी जिक्र आया. उनका तर्क था कि छात्र यह पूछता है कि संस्थाएं अपना काम ठीक से क्यों नहीं कर रही हैं. उनके मुताबिक, यही सवाल करने की आदत स्टूडेंट को अलग बनाती है. वह किसी बात को आंख बंद करके मानने की जगह उसके पीछे की वजह समझना चाहता है.
'स्टूडेंट निडर होता है, सवाल करता है'
राहुल गांधी ने छात्र और 'अंधभक्त' के बीच का फर्क समझाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि स्टूडेंट के भीतर जिज्ञासा होती है. वह दूसरों की बात सुनता है, अपनी राय रखता है, जरूरत पड़ने पर सवाल करता है और नई जानकारी मिलने पर अपनी सोच पर भी विचार कर सकता है.
इसके उलट 'अंधभक्त' शब्द का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी सोच सवाल करने से बचती है. राहुल गांधी ने नफरत, अहंकार और डर का भी जिक्र किया. महिलाओं के सम्मान की बात करते हुए उनका कहना था कि स्टूडेंट महिलाओं की इज्जत करता है, जबकि अंधभक्त वाली सोच महिलाओं के अपमान तक पहुंच सकती है.
पेपर लीक से लेकर नौकरी तक सवाल
शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र यह जानना चाहता है कि स्कूल-कॉलेजों की हालत खराब क्यों है, इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक क्यों नहीं है, पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और युवाओं को रोजगार क्यों नहीं मिल रहा है.
शिक्षा को उन्होंने किसी एहसान की तरह नहीं, बल्कि हर छात्र का हक बताया. स्कूल से कॉलेज, यूनिवर्सिटी से रोजगार तक की पूरी कड़ी मजबूत होने की जरूरत बताई गई. भाषण में शिक्षा के बजट, छात्रवृत्ति और शिक्षकों के खाली पदों का भी जिक्र हुआ. दावा किया गया कि इन कमियों का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है.
मध्य प्रदेश के छात्रों ने भी बताई अपनी परेशानी
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्रों ने अपनी समस्याएं सामने रखीं. धार के एक छात्र ने आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं, जमीन के पट्टों, खाली सरकारी पदों और हॉस्टल की स्थिति का मुद्दा उठाया. उसने खरगोन में पट्टे रद्द होने की बात कही, वहीं बालाघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सवाल भी रखा.
देवास से आए एक छात्र ने MPPSC और भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी समस्याएं बताईं. उसने दावा किया कि भर्ती के मुद्दे उठाने वाले छात्रों पर केस किए गए और जेल भी भेजा गया. उसने पेपर लीक से जुड़ी शिकायतें भी सामने रखीं.
छात्रों ने इंदौर में पढ़ाई करने वाले युवाओं की दूसरी परेशानियां भी बताईं. इनमें कमरों का बढ़ता किराया, सरकारी हॉस्टल में सीटों की कमी, रहने की सुविधाएं और पढ़ाई का बढ़ता खर्च शामिल है.
यूनिवर्सिटी और पढ़ाई की सुविधाओं पर भी सवाल
माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने मास्टर्स में दाखिले को लेकर शिकायत रखी. उसका आरोप था कि अच्छी ग्रेड होने के बावजूद उसे प्रवेश नहीं मिला. इंटरव्यू की स्कोर शीट मांगने पर उसे बताया गया कि ऐसी स्कोर शीट रखी ही नहीं गई है.
एक कृषि छात्र ने कॉलेज में स्थायी शिक्षकों की कमी, क्लासरूम और लड़कियों के लिए जरूरी सुविधाओं का मुद्दा उठाया. एक छात्रा ने छात्रवृत्ति, आवास की मदद और सरकारी हॉस्टल में सीट नहीं मिलने की परेशानी बताई.
'स्टूडेंट देश की नींव है'
अपने संबोधन के आखिर में राहुल गांधी ने छात्रों को देश की नींव बताया. उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर छात्र का अधिकार है. उनके मुताबिक, स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी और फिर रोजगार तक का रास्ता मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी है.
इंदौर के इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों के सवालों को शिक्षा, रोजगार और संस्थाओं के कामकाज से जोड़कर अपनी बात रखी. वहीं मध्य प्रदेश के छात्रों ने भी अपने-अपने इलाकों की समस्याएं सामने रखीं.
'राहुल गांधी का कार्यक्रम झूठ फैलाने की कवायद'
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम पर सीएम मोहन यादव ने पलटवार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि 'छात्रों की गूंज' के नाम पर सही मायने में छात्रों से सवाल-जवाब करने के बजाय कांग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाया गया. उनका कहना था कि नेता विपक्ष जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को युवाओं के सामने तथ्यों के साथ बात रखनी चाहिए. मोहन यादव ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कहा कि इसमें लोगों को गुमराह करने वाली बातें की गईं.
स्कूल शिक्षा को लेकर मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2002-03 में स्कूलों का ड्रॉपआउट रेट 16 फीसदी था, जबकि अब राज्य में जीरो ड्रॉपआउट की स्थिति हासिल करने का दावा किया गया है. शिक्षा बजट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2002-03 तक यह करीब 2,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 38,658 करोड़ रुपये हो गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस के शासन में छात्रों को यूनिफॉर्म, साइकिल, स्कूटर या लैपटॉप जैसी सुविधाएं कितनी दी गईं. मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार बच्चों की पढ़ाई को लेकर ऐसी योजनाओं पर जोर दे रही है.
रवीश पाल सिंह