'प्रोजेक्ट चीता' के 4 साल... भारत में तेजी से बढ़ रहा चीतों का कुनबा, जानें कितनी पहुंची संख्या

प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के साथ भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 52 हो गई है. इनमें 32 चीते देश में ही पैदा हुए हैं. 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों के साथ शुरू हुई इस परियोजना में अब कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अलावा गांधी सागर अभयारण्य तक चीतों का विस्तार हो चुका है.

Advertisement
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी. (Photo: Representational) प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:45 PM IST

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से शुरू हुआ प्रोजेक्ट चीता चार साल पूरे करने जा रहा है. इस दौरान भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 52 हो गई है. इनमें 32 चीते भारत में ही पैदा हुए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, चीतों को नए माहौल में बसाने से लेकर शावकों को बचाने और उन्हें खुले जंगल में छोड़ने तक इस परियोजना के तहत कई अहम पड़ाव हासिल किए गए हैं.

Advertisement

प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी. उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के विशेष बाड़ों में छोड़ा था. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से भी चीते भारत लाए गए.

कूनो में 49, गांधी सागर में तीन चीते

अधिकारी के मुताबिक, देश में मौजूद 52 चीतों में से 49 कूनो नेशनल पार्क में हैं, जबकि तीन मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य में हैं. परियोजना के चार साल के दौरान चीतों के प्रजनन, शावकों के जीवित रहने और उन्हें खुले जंगल में बसाने की दिशा में कई अहम काम हुए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि पहले साल परियोजना से जुड़े दल को चीतों के व्यवहार, स्वास्थ्य और भारतीय परिस्थितियों में उनके प्रबंधन को लेकर कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इन अनुभवों से टीम को चीतों की बेहतर देखभाल और प्रबंधन में मदद मिली.

Advertisement

भारत में पैदा हुए 13 शावक एक साल से ज्यादा जीवित रहे

दूसरे साल परियोजना का मुख्य ध्यान भारत में जन्मे शावकों के जीवन और विकास पर रहा. अधिकारियों के मुताबिक, भारत में जन्मे 13 शावक एक साल से ज्यादा समय तक जीवित रहे. इसे परियोजना की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया गया है.

तीसरे साल यानी 2025 में चीतों को कूनो के खुले जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई. अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराज्यीय क्षेत्र में फैले 12 जिलों में चीतों की 24 घंटे निगरानी की गई. धीरे-धीरे इन चीतों ने नए इलाकों के मुताबिक खुद को ढालना शुरू किया.

नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आए चीतों की स्थिति

अधिकारियों के मुताबिक, नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को लाए गए आठ चीतों में से तीन अभी जीवित हैं. इनके साथ भारत में जन्मे 22 चीते जोड़ने पर नामीबिया से आए चीतों और उनकी संतानों की जीवित संख्या 25 हो जाती है.

18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते भारत लाए गए थे. इनमें से आठ अभी जीवित हैं. भारत में पैदा हुए 10 शावकों को जोड़ने पर दक्षिण अफ्रीकी मूल के चीतों और उनकी संतानों की संख्या 18 हो गई है. इनमें से 15 कूनो और तीन गांधी सागर में हैं.

Advertisement

फरवरी 2026 में बोत्सवाना से नौ और चीते भारत लाए गए. इससे भारत में चीता संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाए जा रहे आधार को और मजबूती मिली.

कूनो में खुले जंगल में 17 चीते

कूनो में मौजूद 49 चीतों में 17 खुले जंगल में हैं. इनमें 10 नर और सात मादा चीते हैं. बाकी 32 चीते फिलहाल विशेष बाड़ों में रखे गए हैं. इनमें पांच नर, आठ मादा और एक साल से कम उम्र के 19 शावक शामिल हैं.

अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना के चौथे साल में प्रजनन करने वाली मादा चीतों की स्थापना और दूसरी पीढ़ी के शावकों का सफलतापूर्वक जीवित रहना बड़ी उपलब्धियों में शामिल है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »