नई दिल्ली में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बातचीत के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक खास डिनर होस्ट किया. स्विस राष्ट्रपति गी पारमेलां और उनकी पत्नी कैरोलिन पारमेलां के सम्मान में यह डिनर रखा गया. इस डिनर की खास बात इसका मेन्यू है, जिसमें भारत के अलग-अलग पहाड़ी इलाकों के पारंपरिक खाने को सामने रखा गया. इस खास दावत में कश्मीर के व्यंजनों के साथ लद्दाख का पारंपरिक पेय भी शामिल रहा.
मेन्यू में कन्ना गुच्छ पुलाव, खट्टे बैंगन यानी त्सोक वांगुन और पारंपरिक शीर्माल रोटी शामिल थी. वहीं मिठाई में फिरनी और शुफ्ता परोसी गई. शुफ्ता एक कश्मीरी पारंपरिक मिठाई है, जिसमें सूखे मेवे और मसालों का इस्तेमाल होता है.
इसे खासतौर पर ठंड के मौसम में खाया जाता है. यह मिठाई कश्मीर की समृद्ध खान-पान की परंपरा की झलक भी देती है. वहीं इस मेन्यू में फिरनी भी शामिल रहा, जो कि चावल से बनने वाली मलाईदार मिठाई है, इसे केसर और इलायची जैसे मसालों से तैयार किया जाता है.
कप में दिखी कश्मीर और लद्दाख की पहचान
खाने के साथ मेहमानों को कश्मीरी कहवा भी परोसा गया. केसर, इलायची और बादाम की खुशबू वाला कहवा कश्मीर की पहचान से जुड़ा पारंपरिक ड्रिंक है. वहीं लद्दाख की गुर-गुर चाय ने मेन्यू में अपनी जगह बनाई. इसे बटर टी भी कहा जाता है. इसमें चाय के साथ नमक और मक्खन का इस्तेमाल होता है और ठंडे, ऊंचाई वाले इलाके में यह पारंपरिक चाय लंबे समय से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है.
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थाली के साथ बातचीत पर जोर
भोज के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत और स्विट्जरलैंड के रिश्तों को साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन पर आधारित बताया. उन्होंने व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक, इनोवेशन और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की बात कही.
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पारमेलां के साथ बातचीत में व्यापार और निवेश, रक्षा उत्पादन, परमाणु ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञान-तकनीक और छात्रों व प्रोफेशनल्स के लिए अवसरों पर चर्चा की थी. एक तरफ दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने की बातें हुईं, तो दूसरी तरफ मेज पर कश्मीर और लद्दाख के स्वादों ने भारत की विविधता की अपनी अलग पहचान बनाई.
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