अमेरिका-ईरान डील पर पीएम मोदी का ट्वीट, कहा- इससे दुनिया में बहाल होगी शांति

अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि इस समझौते से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता लौटने की उम्मीद है.

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अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते का पीएम मोदी ने किया स्वागत. (File Photo: PTI) अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते का पीएम मोदी ने किया स्वागत. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:39 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का खुलकर स्वागत किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्वीट करके कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच जो सहमति बनी है, वह बेहद सराहनीय कदम है. पीएम मोदी के मुताबिक, इस युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया था, जिसके चलते कई देशों को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा.

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पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि इस शांति समझौते के लागू होने से पूरे क्षेत्र में स्थिरता वापस आएगी. इसके साथ ही समुद्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और व्यापार का रास्ता भी पूरी तरह साफ हो सकेगा. उन्होंने कहा कि भारत को पूरी उम्मीद है कि बाकी बचे हुए मुद्दों पर भी दोनों देश आगे बातचीत जारी रखेंगे, जिससे आने वाले समय में एक स्थायी और मजबूत अंतिम समझौता हो सके.

बता दें कि दोनों देशों के बीच 107 दिनों तक चली भीषण जंग के बाद आखिरकार इस शांति समझौते पर अंतिम सहमति बन सकी है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टीवी पर फोन के जरिए पुष्टि की है कि अमेरिका के साथ यह डील अब पूरी तरह अंतिम रूप ले चुकी है. आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस पर दोनों देशों के बीच आधिकारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.

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ईरानी सरकारी मीडिया ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन (MOU) के मसौदे का ब्योरा प्रकाशित करने का दावा किया है. हालांकि, इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी भी देश ने नहीं की है, लेकिन अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, इस मसौदे में दोनों देशों के हितों से जुड़ी कई अहम बातें शामिल हैं.

इस फैसले से वैश्विक तेल व्यापार और समुद्री जहाजों की आवाजाही को बहुत बड़ी राहत मिलेगी. पूरी दुनिया की नजरें अब शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले इस ऐतिहासिक हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हैं

 

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