PMO के नाम पर फर्जीवाड़ा, पीएम की सुरक्षा में चूक? रोहन की कहानी के कई सवाल अनसुलझे

मुंबई के जियो वर्ल्ड प्लाजा से गिरफ्तार किए गए रोहन पारेख और उसके बॉडीगार्ड को 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है. इस मामले में कई ट्विस्ट और कई सवाल हैं.

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11 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजे गए रोहन पारेख 11 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजे गए रोहन पारेख

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:10 PM IST

आज मुंबई में एक ऐसी घटना हुई जिसमें पहली नजर में सब कुछ प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक जैसा दिखाई दिया. लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी में एक के बाद एक ऐसे ट्विस्ट आए कि सवाल सिर्फ सुरक्षा का नहीं रहा बल्कि फर्जी सरकारी अफसरों के उस खतरनाक जाल तक पहुंच गया, जिसमें कोई व्यक्ति अपराधी भी हो सकता है और खुद ठगी का शिकार भी.

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ये पूरी घटना 7 सितंबर की है, जब मुंबई के जियो वर्ल्ड कंवेंशन सेंटर में एक बड़े कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं. प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी थी और आसपास के पूरे इलाके में आने-जाने वाले लोगों की जांच की जा रही थी.

इसी जांच के दौरान पुलिसकर्मियों को दो लोगों पर शक हुआ. जब उनसे पूछताछ हुई तो उनमें से एक लड़के ने दावा किया कि वो प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO से जुड़ा हुआ है. और उसने सुरक्षा कर्मियों से कहा कि उसे अंदर जाने से रोका ना जाए. मुंबई पुलिस के मुताबिक इस लड़के का नाम रोहन पारेख है. और उसके साथ आए बॉडीगार्ड का नाम दिलीप कुंडे है.

रोहन ने किया PMO में काम करने का दावा

जब मेटल डिटेक्टर से रोहन पारेख के बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे ने अंदर जाने की कोशिश की तब उसमें सुरक्षाकर्मियों को उसके पास बंदूक होने का अंदेशा हुआ. पुलिस ने तलाशी ली तो उसके पास से एक बंदूक मिली. इसके बाद बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे ने रोहन पारेख को फोन किया. जब रोहन पारेख वहां पहुंचा तो उसने सुरक्षाकर्मियों को अपना एक पहचान पत्र दिखाया. और दावा किया ये पहचान पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO का है.

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इस ID कार्ड में रोहन पारेख को PMO का ग्रेड सी का अधिकारी बताया गया था लेकिन यहीं से सुरक्षाकर्मियों का शक और गहरा गया. शक का कारण यही था कि इस पहचान पत्र पर उसके जारी होने की तारीख तो लिखी थी लेकिन ये नहीं लिखा था कि वैध कब तक है. इसके अलावा कार्ड पर जारी करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर तो थे लेकिन उस अधिकारी का नाम नहीं लिखा था. जबकि PMO के आईडी कार्ड पर उसे जारी करने वाले अधिकारी का नाम ज़रूर होता है. यहीं से सुरक्षाकर्मियों को शक हुआ और पुलिस ने दोनों लोगों को हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल दोनों को 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है. 

अब यहां से ये कहानी बहुत सीधी दिखाई दी. लेकिन इसके बाद कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने इस पूरे मामले को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया. जिस लड़के ने खुद को PMO का अधिकारी बताया था, उसके वकील ने अदालत में दावा किया कि रोहन खुद एक ठगी का शिकार हुआ है. 

रोहन पारेख के वकील के मुताबिक उसे पिछले कुछ समय में ऐसे कई दस्तावेज और ई-मेल मिले थे, जिनसे उसे विश्वास हो गया कि उसे हकीकत में PMO में नौकरी मिल गयी है. दावा है कि उसे ई-मेल के जरिए PMO में नौकरी का ऑफर लेटर भेजा गया. और उसे ई-मेल पर ही एक आईडी की कॉपी भेजी गई. साथ ही, ये भी दावा किया गया कि उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी भेजा गया, जिसमें उसे PMO से जुड़ा अधिकारी बताया गया था.  कोर्ट में सबूत के तौर पर कुछ ई-मेल भी पेश किए गए.

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तरुण कुमार नामक शख्स ने दिया PMO में काम करने का प्रस्ताव

इन ई-मेल में तरुण कपूर नाम के एक व्यक्ति का जिक्र था और कहा गया कि इसी व्यक्ति ने रोहन को PMO में काम करने का प्रस्ताव दिया था. इसके बाद तरुण गुप्ता नाम के एक व्यक्ति की तरफ से उसे डिफेंस एक्विशिसन पॉलिसी से जुड़े ई-मेल भेजे गए. और महक गुप्ता नाम की एक महिला की ओर से रोहन को एडवाइजरी रोल में नौकरी का प्रस्ताव भेजे जाने का दावा किया गया. रोहन के वकील का कहना है कि ई-मेल के जरिए उसे यहां तक निर्देश दिए गए थे कि उसे अपनी सुरक्षा के लिए एक बॉडीगार्ड रखना चाहिए.

यानी दावा ये है कि रोहन पारेख ने खुद को कोई सरकारी अधिकारी दिखाने के लिए बॉडीगार्ड नहीं रखा था बल्कि उसे ई-मेल के जरिए यही बताया गया था कि अब वो एक बड़े पद पर है और उसे सुरक्षा की जरूरत है. रोहन का ये भी कहना है कि वो प्रधानमंत्री मोदी के 'कार्यक्रम' में शामिल होने या किसी हाई-सिक्योरिटी इलाके में घुसने के लिए जियो वर्ल्ड प्लाजा नहीं आया था बल्कि वो अपनी मंगेतर के लिए परफ्यूम खरीदने वहां पहुंचा था.

रोहन के मुताबिक, 2024 में उसे PMO में नौकरी का ऑफर लेटर मिला लेकिन सवाल है कि जब उसे तनख्वाह ही नहीं मिल रही थी तो ये खुद को PMO का असली अफसर कैसे समझता रहा. दूसरा- अगर ये खुद को PMO का अधिकारी बता रहा है तो इसने अपना निजी बॉडीगार्ड कैसे रख लिया. और ये लड़का इतना पढ़ा-लिखा है और इसने गणित और विज्ञान में BSc की पढ़ाई की है लेकिन इसके बावजूद इसने अंजान ई-मेल से आए कुछ दस्तावेज़ों पर इतनी आसानी से यकीन कैसे कर लिया.

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अगला सवाल ये भी है कि इसने अपना निजी बॉडीगार्ड कैसे रखा. क्योंकि इतनी बात तो हर कोई जानता है कि अगर किसी अफसर को सुरक्षा देनी होती है तो ये काम सरकार का होता है, ना कि अधिकारी खुद अपने निजी बॉडीगार्ड रखते हैं. सोचने वाली बात ये है कि जहां प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम होना था, वहां इत्तेफाक से ये लड़का प्रधानमंत्री के कार्यालय का ही अफसर बनकर कैसे पहुंच गया.

अब इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस देश में कितने लोग नकली सरकारी अफसर बनकर घूम रहे हैं.

पहले भी हुई ऐसी घटनाएं

बता दें, पिछले महीने मनीष कुमार गुप्ता की गिरफ्तारी हुई थी, जो खुद को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल का अंडरकवर एजेंट बताता था. बिहार के खगड़िया में इसने एक पांच मंज़िला मकान बनाया, जिसमें 100 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए. और इलाके में ये बात भी फैली कि इस घर में एक स्वीमिंग पुल भी हो सकता है. खगड़िया के लोगों के लिए ऐसा घर सामान्य नहीं था. ये बिहार का वो जिला है, जो बाढ़ के लिए जाना जाता है और जहां हर साल घर डूबते हैं. लेकिन उस खगड़ियां में जब ये खबर फैली कि मनीष कुमार गुप्ता एक IAS अधिकारी है और अजित डोभाल उस पर काफी भरोसा करते हैं तो लोग उससे प्रभावित होने लगे.

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यही नहीं इस व्यक्ति ने अपनी गाड़ियों पर 'Government of India' भी लिखवाया था. लेकिन पुलिस ने इस व्यक्ति को संदिग्ध मानते हुए कार्रवाई की और जब पुलिस को भी इस व्यक्ति ने अपना परिचय एक IAS अधिकारी का दिया तो ये बुरी तरह फंस गया.

पुलिस ने इसकी पूरी कुंडली निकाल ली और ये पता चला कि इस व्यक्ति ने पिछले 10 साल में फर्जी IAS अधिकारी बनकर कई लोगों को चूना लगाया. और 10 साल में लगभग 100 करोड़ रुपये की संपत्ति बना ली. ऐसा नहीं है कि ये खुद को फर्जी IAS या आईपीएस अधिकारी बताने की पहली घटना थी. पिछले कुछ सालों में ऐसे कई लोग पकड़े गए हैं, जो खुद को NSA अजित डोभाल, गृह मंत्री अमित शाह और कई बार प्रधानमंत्री कार्यालय का अधिकारी बताते हैं और बाद में ये सारे लोग फर्जी निकलते हैं.

साल 2023 में गुजरात के किरण पटेल ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए ये दावा किया था कि उसे जम्मू-कश्मीर में सरकार की ओर से सेब की पैदावार और सुरक्षा से जुड़े कामों की निगरानी के लिए भेजा गया है. ये सुनने के बाद जम्मू कश्मीर का प्रशासन इस व्यक्ति की आवभगत में लग गया. इसे प्रोटोकॉल के तहत सरकारी गाड़ियां और सुरक्षाकर्मी दिए गए और ये व्यक्ति सबको वहां चूना लगाता रहा. और अब इस मामले में भी एक ऐसे ही कहानी सामने आ रही है. 

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