'ओडिशा हादसे ने रेलवे विकास के दावों की हवा निकाल दी', सामना में सरकार पर हमला

ओडिशा के बालासोर में हुए हादसे पर शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार पर रेलवे विकास के दावों को लेकर निशाना साधा है. अपने मुखपत्र में शिवसेना (यूबीटी) ने लिखा कि ओडिशा हादसे ने रेलवे विकास के दावों की हवा निकाल दी है.

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बालासोर में भीषण ट्रेन हादसा बालासोर में भीषण ट्रेन हादसा

सौरभ वक्तानिया

  • मुंबई,
  • 05 जून 2023,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST

ओडिशा के बालासोर में हुए हादसे को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र 'सामना' में सरकार पर निशाना साधा है. 'सामना' में कहा गया है कि बीते छह-सात साल में बुलेट ट्रेन, वंदे भारत ट्रेन जैसे रेलवे विकास के कई गुब्बारे हवा में छोड़े गए, उन सभी की हवा शुक्रवार को हुए हादसे ने निकाल दी. 

'सामना' के संपादकीय में लिखा, "सरकार ने रेल दुर्घटना अवरोधी 'सुरक्षा कवच' के दावे किए थे, लेकिन बालासोर के ट्रेन हादसे ने उसकी पोल खोल दी है. शुक्रवार शाम को हुए हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश में रेल यात्रा असुरक्षित हैं, रेल यात्रियों का जीवन क्षणभंगुर और बेभरोसे है.  

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बालासोर हादसे पर 'सामना' में कहा गया कि अब इस बात पर बहस छिड़ गई है कि हमेशा की तरह मानवीय भूल जिम्मेदार है या तकनीकी गड़बड़ी. यह आगे भी चलती रहेगी, लेकिन हादसे में बेवजह मारे गए यात्रियों और उनके परिवार वालों का इसमें क्या कसूर था?  

रेलवे विकास के दावों को लेकर सवाल पूछते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद से रेलवे के विकास और सुरक्षा को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उन दावों पर ही यह दुर्घटना सवाल खड़े कर रही है. पिछले छह-सात साल में बुलेट ट्रेन, वंदे भारत ट्रेन जैसे रेलवे विकास के कई गुब्बारे हवा में छोड़े गए. उन सभी गुब्बारों की हवा शुक्रवार को हुए हादसे ने निकाल दी है.  

शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र में लिखा, "दो ट्रेनों के बीच टक्कर न हो, इसके लिए रेलमंत्री ने `सुरक्षा कवच’ का गुणगान पिछले साल किया था. यह सुरक्षा कवच यानी रेल दुर्घटना रोकनेवाली बड़ी क्रांति (भक्तों की भाषा में `मास्टर स्ट्रोक’) है, यदि ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने आ जाती हैं, तो इस सुरक्षा प्रणाली के कारण वे पहले ही रुक जाएंगी और टकराने से बच जाएंगी, ऐसा बताया गया था."  

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रेल मंत्री ने खुद प्रैक्टिकल किया था: सामना 

खुद रेलमंत्री ने इसका प्रैक्टिकल करके दिखाया था. फिर भी शुक्रवार को भयानक ट्रेन हादसा कैसे हुआ? यहां दो नहीं बल्कि तीन ट्रेनें आपस में टकरा गईं. सामना में पूछा गया कि आपका वह सुरक्षा कवच कहां गया. क्या अब यह कहा जाए कि जनता को दिखाए गए ये `कवचकुंडल’ केवल उन्हीं रेलगाड़ियों के लिए ही थे, जिनमें रेलमंत्री ने प्रैक्टिकल करके दिखाए थे? 

सरकार को लेनी होगी जिम्मेदारी: सामना 

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि सुरक्षित रेल यात्रा का वादा करने वाली मोदी सरकार के खोखले दावों ने ये बलि ली है. इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी ही होगी. तकनीकी खराबी, मानवीय भूल या पटरी से उतरे डिब्बों पर ठीकरा फोड़कर सरकार अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भाग सकती है. 

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