करोड़ों-अरबों रुपये की लागत से बने चमचमाता एक्सप्रेसवे जब पहली ही बरसात में धंसने लगें, तो सवाल उठना लाजिमी है. कानपुर-लखनऊ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में अचानक जमीन धंसने और सड़क टूटने का मामला इन दिनों तूल पकड़े हुए है. इस बीच, इस मेगा प्रोजेक्ट को बनाने वाली निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक की सफाई सामने आ गई है.
कंपनी ने अपनी गलती मानने के बजाय सारा ठीकरा आसमान से बरसने वाली बारिश पर फोड़ दिया है. इतना ही नहीं बेशर्मी से दावा किया है कि सड़क के निर्माण में कोई तकनीकी खामी नहीं थी, बल्कि भारी बारिश ने सब चौपट किया.
'हमारा कोई कसूर नहीं, बारिश ने किया खेल'
बवाल बढ़ता देख कंपनी ने आखिरकार अपनी सफाई दी. कंपनी ने अपनी सफाई में कहा है कि इस एक्सप्रेसवे को हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल HAM के तहत तैयार किया गया है. कंपनी का दावा है कि सड़क बनाने में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया NHAI के तय किए गए सभी तकनीकी मानकों और क्वालिटी नॉर्म्स का पूरी तरह पालन किया गया था.
कंपनी ने दलील दी है कि सड़क के कुछ हिस्सों में जो नुकसान हुआ है, उसकी असली वजह कोई घटिया निर्माण सामग्री नहीं, बल्कि लगातार हुई भारी बारिश और वहां पानी का जमा होना है. पानी भरने की वजह से सड़क की मिट्टी बैठ गई और रास्ते में दिक्कतें आईं.
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'ट्रैफिक चालू है, मरम्मत का खर्च हम उठाएंगे'
अपनी पीठ थपथपाते हुए कंपनी ने यह भी कहा कि एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की आवाजाही अभी सुचारू रूप से चल रही है. आने-जाने वाले लोगों को कोई बहुत ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ रही है.
कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि जहां-जहां सड़क टूटी है या धंसी है, वहां तुरंत मरम्मत का काम शुरू कर दिया है. राहत की बात यह है कि इस रिपेयरिंग का पूरा खर्च कंपनी खुद अपनी ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस जिम्मेदारी के तहत उठाएगी. इसका मतलब है कि सरकारी यानी NHAI की जेब पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा.
कंपनी ने आखिर में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे एक्सप्रेसवे की सुरक्षा, मजबूती और क्वालिटी को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं.
भले ही कंपनी बारिश को दोष देकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही हो, लेकिन लोगों के मन में यह सवाल बड़ा है कि अगर सड़क बनाने में वाकई सब कुछ सही था, तो क्या भारत में बारिश होना कोई नई बात है? हर साल बरसात आती है, तो क्या हर बार एक्सप्रेसवे ऐसे ही धंसते रहेंगे? फिलहाल कंपनी ने मरम्मत का जिम्मा तो ले लिया है, लेकिन इस घटना ने सड़क निर्माण की पोल खोलकर रख दी है.
सिमर चावला