पॉलिटिकल कंटेंट में छोटे बच्चों का इस्तेमाल क्यों? मानवाधिकार आयोग ने META को भेजा नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के एटा में एक कोचिंग सेंटर से जुड़े नाबालिग बच्चों के राजनीतिक वीडियो में इस्तेमाल होने पर संज्ञान लिया है. आयोग ने Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव, एटा के SSP और जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है.

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एटा के एक कोचिंग संस्थान से जुड़े मामले में NHRC ने नोटिस दिया है एटा के एक कोचिंग संस्थान से जुड़े मामले में NHRC ने नोटिस दिया है

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:40 PM IST

पॉलिटिकल कंटेंट के वीडियो में बच्चों को लिए जाने को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है. मामला उत्तर प्रदेश के एटा की एक कोचिंग सेंटर से जुड़ा है. वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया. आयोग ने एटा के SSP और जिलाधिकारी के साथ Meta India के मैनेजिंग डायरेक्टर व  कंट्री हेड और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव को नोटिस जारी किया है.

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NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी संबंधित पक्षों से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एटा के एक कोचिंग सेंटर से जुड़े नाबालिग बच्चों को स्क्रिप्ट देकर बार-बार आपत्तिजनक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील वीडियो में इस्तेमाल किया गया. इन वीडियो को एक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए प्रसारित किया गया. 

शिकायत में बच्चों की गरिमा, निजता, मानसिक स्थिति, माता-पिता की सहमति और संभावित शोषण को लेकर चिंता जताई गई है. सूत्रों के मुताबिक, कई वीडियो में कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले बच्चों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पॉलिटिकल कंटेंट में किया गया. कुछ वीडियो में 'वोट चोरी' से जुड़े राजनीतिक नारे और 'CJP समर्थक' कंटेंट होने की बात भी कही गई है.

बच्चों की पहचान कर सुरक्षा और काउंसलिंग के निर्देश
NHRC ने पुलिस को वीडियो में दिखाई देने वाले बच्चों की पहचान करने और उनकी सुरक्षा एवं काउंसलिंग तयकरने का निर्देश दिया है. साथ ही सोशल मीडिया अकाउंट को कंट्रोल करने वाले लोगों की पहचान करने को कहा गया है. आयोग ने वीडियो की स्क्रिप्ट तैयार करने, रिकॉर्डिंग करने, उसे अपलोड करने या इस प्रक्रिया में मदद करने वाले वयस्कों की भूमिका की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं. अगर जांच में कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है तो FIR दर्ज करने समेत उचित कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है.

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Meta से भी मांगा जवाब
NHRC ने Meta से पूछा है कि नाबालिगों से जुड़े ऐसे कंटेंट को बार-बार अपलोड और वायरल कैसे होने दिया गया. आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या इन वीडियो से किसी तरह की कमाई या व्यावसायिक लाभ हुआ. Meta से सामग्री को प्रतिबंधित या हटाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी गई है. इसके साथ ही संबंधित डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने को कहा गया है.

NHRC ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में शामिल नाबालिगों को मुख्य रूप से संरक्षण और आकलन की जरूरत वाले बच्चों के रूप में देखा जाना चाहिए. जांच का फोकस उन वयस्कों और अन्य लोगों की पहचान पर होना चाहिए, जो कथित तौर पर ऐसी सामग्री की स्क्रिप्टिंग, निर्माण, अपलोडिंग, नियंत्रण या व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार हैं.

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