पश्चिम बंगाल के नदिया जिले स्थित नबाद्वीप महाश्मशान में एक ऐसी चौंकाने वाली घटना घटी, जिसने वहां मौजूद हर शख्स के रोंगटे खड़े कर दिए. अपनी मृत दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए पोते ने अचानक शव के साथ ही जलती हुई इलेक्ट्रिक भट्टी के अंदर छलांग लगा दी. श्मशान घाट के कर्मचारियों और परिजनों की मुस्तैदी से युवक को समय रहते भट्टी से बाहर खींच लिया गया, जिससे उसकी जान तो बच गई, लेकिन चेहरा और आंखें आंशिक रूप से झुलस गई हैं.
दरअसल, बांग्लादेश सीमा से सटे गेडे बॉर्डर इलाके से एक बुजुर्ग महिला के निधन के बाद परिजन उनके अंतिम संस्कार के लिए शव को नबाद्वीप महाश्मशान लेकर आए थे. नियमानुसार शव को इलेक्ट्रिक भट्टी में भेजने के लिए लोहे की ट्रॉली पर रखा गया था.
जैसे ही भट्टी का दरवाजा खुला और ऑटोमैटिक ट्रॉली अंदर जाने लगी, तभी मृतका के 30 वर्षीय पोते इंद्रजीत बिस्वास ने सभी को चौंकाते हुए शव के ऊपर ही छलांग लगा दी. देखते ही देखते ट्रॉली युवक और शव दोनों को लेकर भट्टी के मुहाने के अंदर प्रवेश कर गई.
चीख-पुकार के बीच कर्मचारियों ने दिखाया साहस
अचानक घटी इस घटना से श्मशान परिसर में हड़कंप मच गया और परिजनों के साथ-साथ वहां मौजूद अन्य लोगों में चीख-पुकार मच गई. माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया. हालात को भांपते हुए श्मशान घाट के कर्मचारियों और परिजनों ने बिना एक पल गंवाए जान जोखिम में डालकर भट्टी के पास दौड़ लगाई और भारी मशक्कत के बाद इंद्रजीत को खिंचकर बाहर निकाला.
हालांकि, जब तक उसे बाहर निकाला जाता, भट्टी की अत्यधिक गर्मी के कारण उसका चेहरा, आंखें और शरीर के कुछ हिस्से आंशिक रूप से झुलस चुके थे. देखें VIDEO:-
अस्पताल में चल रहा इलाज
घटना के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार के साथ इंद्रजीत को नबाद्वीप स्टेट जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल सूत्रों के मुताबिक डॉक्टरों की देखरेख में उसका बर्न वार्ड में इलाज जारी है और फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है.
कदम उठाने की वजह अस्पष्ट
इस खौफनाक कदम के पीछे की असल वजह अभी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है. मौके पर मौजूद कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घटना के समय युवक अत्यधिक नशे के प्रभाव में था. वहीं, परिवार के सदस्यों का कहना है कि दादी की मौत के सदमे और मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
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