क्या नरोत्तम मिश्रा पर बीजेपी को भरोसा नहीं? खानी पड़ी पीतांबरा माई की कसम, राजनीतिक हलचल तेज

MP की सियासत में 'संकटमोचक' और वफादारी के पर्याय माने जाने वाले पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर इन दिनों जो राजनैतिक हवा चल रही है, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वाकई पार्टी और नए प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के मन में नरोत्तम मिश्रा को लेकर कोई 'संशय' या 'भरोसा उठने' जैसी स्थिति है?

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नरोत्तम मिश्रा और आशुतोष तिवारी को खानी पड़ी 'माई' की कसम!(Photo:ITG) नरोत्तम मिश्रा और आशुतोष तिवारी को खानी पड़ी 'माई' की कसम!(Photo:ITG)

अशोक शर्मा

  • दतिया,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:12 PM IST

मध्य प्रदेश बीजेपी के सबसे कद्दावर नेताओं और पार्टी के वफादार माने जाने वाले नेताओं में से एक पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से क्या बीजेपी नेताओं का भरोसा उठ रहा है? राजनीतिक हलकों में यह प्रश्न आजकल हवा में तैर रहा है. खासकर गुरुवार को बीजेपी कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद यह सवाल यक्ष प्रश्न बन गया है कि नरोत्तम मिश्रा पर पार्टी और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी कितना भरोसा कर रहे हैं. 

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दरअसल, जब होटल रतन रॉयल में कार्यकर्ताओं की बैठक चल रही थी तो नरोत्तम मिश्रा ने केवल यह कहकर अपनी बात खत्म नहीं कि मैं आशुतोष का प्रचार करूंगा. उन्होंने कहा, ''मैं पीतांबरा माई की कसम खाता हूं कि मैं आशुतोष तिवारी के साथ हूं. मैं पूरी निष्ठा और मन से आशुतोष का प्रचार करूंगा और आप सभी कार्यकर्ता भी आज से ही प्रचार में जुट जाएं.'' 

एकतरफा नहीं, दोनों तरफ है अविश्वास की खाई!

दिलचस्प बात यह रही कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा केवल खुद कसम खाकर नहीं रुके. उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए सीधे प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की तरफ इशारा किया और कहा कि 'मैं आशुतोष से भी निवेदन करता हूं कि वे भी माई को साक्षी मानकर कहें कि वे कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में हमेशा साथ रहेंगे.'

इसके बाद आशुतोष तिवारी को भी मंच पर आकर मां पीतांबरा की कसम खानी पड़ी. उन्होंने कहा कि वे हमेशा हर वक्त कार्यकर्ताओं के साथ खड़े दिखेंगे. देखें VIDEO:- 

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क्या दोनों नेता एक-दूसरे पर भरोसा नहीं कर रहे?

इससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा नहीं कर रहे हैं क्या? क्या आशुतोष तिवारी भी यह मान रहे हैं कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट कट गया इसलिए वे प्रचार नहीं करेंगे? क्या दोनों नेता एक दूसरे पर भरोसा नहीं कर रहे हैं? 

दतिया की इस बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि दोनों नेताओं के बीच 'सबकुछ सामान्य' तो कतई नहीं है. भले ही मंच से एकजुटता के नारे लगाए जा रहे हों, लेकिन 'मां पीतांबरा की कसम' दिलवाने की नौबत आना ही इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि दोनों पक्षों में गहरे स्तर पर भरोसे की कमी है.

आशुतोष तिवारी को जहां 'भीतरघात' की आशंका सता रही है, वहीं नरोत्तम मिश्रा अपनी राजनैतिक प्रासंगिकता और वफादारी पर उठ रहे सवालों का जवाब देने के लिए इस तरह के भावुक कार्ड खेलने को मजबूर हैं.

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