दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 अब जोर पकड़ रहा है. कर्नाटक में भारी बारिश का सिलसिला जारी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को तटीय जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है. IMD के अनुसार, 7 जून 2026 को मॉनसून ने पश्चिम-मध्य भारत और पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी के कई इलाकों में आगे बढ़कर अच्छी स्थिति बना ली है. इसमें नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम के पूरे इलाके और असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा के कुछ हिस्से शामिल हैं.
मॉनसून की उत्तरी सीमा (Northern Limit of Monsoon) अब 17.5°N/60°E, 17.5°N/65°E, 17°N/70°E, देवगढ़, कोप्पल, आनंतपुरमु, चेन्नई, 15.5°N/85°E, 22°N/90°E और अन्य जगहों से होकर गुजर रही है.
अगले 3-4 दिनों में और आगे बढ़ेगा मॉनसून
IMD ने बताया कि अगले 3-4 दिनों में मॉनसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों के बाकी हिस्सों में और आगे बढ़ने की अच्छी संभावना है.
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कर्नाटक में भारी बारिश का अलर्ट
मॉनसून की बढ़ती गति के साथ कर्नाटक में बारिश तेज हो रही है. IMD ने तटीय जिलों दक्षिण कन्नड़ (दक्षिण कन्नड़ा) और उडुपी के लिए सोमवार को रेड अलर्ट जारी किया है. जबकि मंगलवार के लिए पांच जिलों में रेड अलर्ट जारी है, इन जिलों में दक्षिण कन्नड़, उडुपी, उत्तर कन्नड़, चिक्कमगलूरु और शिवमोग्गा शामिल हैं. इसके अलावा बुधवार के लिए सात जिलों में रेड अलर्ट जारी है. इनमें उडुपी, उत्तर कन्नड़, चिक्कमगलूरु, शिवमोग्गा, बेलगावी, धारवाड़ और हावेरी शामिल हैं.
रेड अलर्ट का मतलब क्या है?
रेड अलर्ट का मतलब है कि 24 घंटों में 20 सेंटीमीटर से ज्यादा भारी बारिश होने की संभावना है. ऐसे में निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर जलजमाव और यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है.
IMD ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें. मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है. किसान भी अपनी फसलों की सुरक्षा का ध्यान रखें. मौसम विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अलर्ट को अपडेट किया जाएगा. वहीं, कर्नाटक सरकार भी राहत कार्यों के लिए तैयार है.
मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून सामान्य से पहले या समय पर आगे बढ़ रहा है, जिससे कृषि कार्यों को अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद है. लेकिन भारी बारिश से होने वाले नुकसान से बचने के लिए अलर्ट रहना होगा.
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