अगर आपने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर देखे हैं, तो आपको कुछ चेहरे जरूर याद होंगे. इन्हीं में से एक चेहरा फेरीवाले मोहम्मद इरफान का है,जिन्होंने मजदूरों और वंचितों के रोजमर्रा के संघर्षों पर अपने बेबाक विचारों से देशभर का ध्यान खींचा.कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से वायरल हुए इरफान से सोमवार (27 जुलाई) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुलाकात की. इस दौरान इरफान ने राहुल गांधी से साफ कहा कि अगर वे अपने वादे पूरे नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ भी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया जाएगा.
द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में मोहम्मद इरफान ने राहुल गांधी से हुई बातचीत, गरीबी के अपने अनुभव, मजदूरों के सामने आने वाली चुनौतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की अपनी इच्छा के बारे में खुलकर बात की.इरफान ने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि वह भी एक दिन सत्ता में आ सकते हैं. इसलिए उन्हें अभी से प्रवासी और दिहाड़ी मजदूरों के हित में काम करना चाहिए.
इरफान ने कहा कि मैंने उनसे कहा कि अगर आप अपने वादों से मुकर गए, तो हम आपका भी विरोध करेंगे और सड़कों पर उतरेंगे. मैं तटस्थ हूं और इस देश का भला चाहता हूं. अगर देश तरक्की कर रहा है, तो सभी लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए. किसी को भी वंचित नहीं किया जाना चाहिए.'
मजदूरी का मुद्दा उठाया था
परीक्षा पेपर लीक को लेकर सीजेपी के आंदोलन में सफेद कपड़े और गले में गमछा डाले इरफान एक प्रमुख आवाज बनकर उभरे. दिल्ली की सवदा जेजे कॉलोनी के रहने वाले इरफान ने राहुल गांधी के सामने दिहाड़ी मजदूरों में बढ़ती आत्महत्याओं का मुद्दा भी उठाया.उन्होंने कहा कि 2024 के NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 1,77,746 लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 31 प्रतिशत दिहाड़ी मजदूर थे. इसके पीछे आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव सबसे बड़ी वजह थी. उन्होंने कहा, "हम उन लोगों को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं, जिनके पसीने और खून से यह देश बना है?"
इरफान ने यह भी बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में न्यूनतम मासिक वेतन 18,000 रुपये बताया गया है, लेकिन कई मजदूर 10-11 घंटे काम करने के बावजूद सिर्फ 13,000-14,000 रुपये ही कमा पाते हैं. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया और कहा कि बड़ी संख्या में छात्र 10वीं या 12वीं से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं. इरफान ने कहा, "यह एक गंभीर सवाल है. शिक्षा ही व्यक्ति और देश, दोनों का भविष्य बदल सकती है." उन्होंने कहा कि सरकार ने युवाओं के लिए पॉलिटेक्निक और आईटीआई जैसे संस्थान तो बनाए हैं, लेकिन इनका लाभ अधिकतर मध्यम वर्ग और संपन्न परिवारों तक ही सीमित है.
इरफान ने कहा कि 'इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई और बढ़ती है. शिक्षा ऐसी होनी चाहिए,जो सभी को बराबर अवसर दे. यही वजह है कि हम जंतर-मंतर पर बैठे थे."उन्होंने आगे कहा, "हर पांच साल में राजनीतिक दल हमें बेहतर जिंदगी का वादा करते हैं. जब जिंदगी नहीं बदलती, तो हमें उनसे सवाल पूछने का अधिकार है, चाहे इसके लिए हमें देशद्रोही कहा जाए या आतंकवादी.'
प्रियंका गांधी का आया फोन
इरफान ने बताया कि उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा हासिल नहीं की और न ही वह पढ़ना-लिखना जानते हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी सीख 'यूट्यूब यूनिवर्सिटी' और मोबाइल पर गूगल वॉयस सर्च के जरिए हासिल की है. उन्होंने बताया कि राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान एक बार प्रियंका गांधी का फोन आया. इरफान के मुताबिक, प्रियंका गांधी ने उनसे कहा कि 'राहुल गांधी को शादी करने के लिए समझाइए. वह मेरी बात नहीं सुनते.'
इस पर इरफान ने मजाकिया अंदाज में कहा कि 'मैं तो चाहूंगा कि राहुल गांधी कभी शादी ही न करें. वह मुझसे बड़े हैं और बहुत नेकदिल इंसान हैं.' बाद में राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुलाकात का जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि इरफान जैसे युवाओं की सोच यह दिखाती है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा हैं. राहुल गांधी ने लिखा कि 'मैं इरफान से मिला, जिनकी सोच उनकी परिस्थितियों से कहीं आगे है. ऐसे लाखों युवा देश की असली उम्मीद हैं. वे सीखने वाले हैं, संवेदनशील हैं और अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक हैं.'
अमित शाह से क्यों मिलना चाहते हैं इरफान?
द लल्लनटॉप के इंटरव्यू में इरफान से पूछा गया कि क्या वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना चाहेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, हालांकि वैचारिक मतभेद हमेशा रहेंगे. लेकिन प्रधानमंत्री से पहले वह गृह मंत्री अमित शाह से मिलना चाहेंगे. इरफान ने कहा कि वह अमित शाह के सामने नशे से जुड़े मामलों में पुलिस की कथित लापरवाही का मुद्दा उठाना चाहते हैं. उनके मुताबिक, शिकायत मिलने के बावजूद कई बार पुलिस कार्रवाई नहीं करती.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 'हमारी झुग्गी बस्ती में 12 साल का बच्चा भी बता सकता है कि गांजा और दूसरे नशीले पदार्थ कहां बिकते हैं, लेकिन किसी तरह पुलिस को इसकी जानकारी नहीं होती.'
संविधान की प्रस्तावना पढ़कर हुए थे वायरल
सवदा जेजे कॉलोनी की तंग गलियों से निकलकर पूरे देश में पहचान बनाने वाले मोहम्मद इरफान पहली बार उस समय चर्चा में आए, जब उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान संविधान की प्रस्तावना और उर्दू शायर अहमद फ़राज़ की पंक्तियां पढ़ीं.इरफान ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना समानता की बात करती है. यह देश के सभी संसाधनों पर सभी लोगों के बराबर अधिकार की बात करती है.'
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