मणिपुर एक बार फिर से धधक रहा है. कुकी और मैतेई समुदायों के बीच महीनों तक हिंसक संघर्ष में झुलसने के बाद ऐसा लगने लगा था कि अब राज्य में शांति लौट रही है. लेकिन ताजा हालात ने एक बार फिर मणिपुर को लेकर टेंशन बढ़ा दी है.
राज्य के कामजोंग जिले के एक पहाड़ी गांव में शनिवार देर रात कुकी समुदाय के 15 घरों को आग के हवाले कर दिया गया. इस वजह से बड़ी संख्या में नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े. उन्हें जंगलों और पास स्थित आर्मी कैंप में शरण लेनी पड़ी.
अधिकारियों के रविवार को बताया कि कल देर रात संदिग्ध उग्रवादियों ने चस्साद गांव पर हमला किया और कई घरों में आग लगा दी. इस कारण कई लोगों को दहशत की वजह से अपने घर छोड़ने पड़े.
इससे पहले शनिवार को भी उग्रवादियों ने गांव पर हमला किया था. इस अटैक में एक कुकी नागरिक की मौत हो गई और चार अन्य लोग गोली लगने से घायल हो गए थे.
स्थानीय पुलिस ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और कामजोंग पुलिस की एक संयुक्त टुकड़ी तैनात की गई है.
इस बीच शनिवार रात कामजोंग जिले के मुख्यालय में एक अलग समुदाय के उपद्रवियों ने गांव पर हमला किया. इस हमले में तीन तांगखुल नगा नागरिक गोली लगने से जख्मी हो गए.
मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने चस्साद में हुई हिंसा की निंदा की. उन्होंने कुकी नागरिक की मौत पर दुख व्यक्त किया. घायल ग्रामीणों और विस्थापित परिवारों को लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने घरों को जलाने की घटना को असहनीय अपराध बताया.
डिप्टी सीएम ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों को 24 घंटे सतर्क रहने, नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को पकड़ने के निर्देश दिए हैं.
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