मणिपुर में लंबे समय से चल रही शांति प्रक्रिया को मंगलवार को एक बड़ी सफलता मिली, जब प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन केसीपी-पीडब्ल्यूजी के 46 सदस्यों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया. यह कार्यक्रम इंफाल के मंत्रिपुखरी स्थित असम राइफल्स (दक्षिण) के मुख्यालय में आयोजित किया गया, जिसे मणिपुर होम डिपार्टमेंट ने तैयार किया था.
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के सामने हथियार सौंपे. सरकारी बयान के अनुसार, इन उग्रवादियों ने तीन एके सीरीज राइफल, चार एके-56 राइफल, एक इंसास एक्स-कैलिबर राइफल, एक सेल्फ लोडिंग राइफल, एक 9 एमएम कार्बाइन, तीन. 303 राइफल, एक आरपीजी लॉन्चर, दो 9 एमएम पिस्तौल, एक 7.65 एमएम पिस्तौल, दो डबल बैरल बंदूकें और नौ सिंगल बैरल बंदूकें सौंपी.
इसके अलावा उग्रवादियों के पास से 16 मैगजीन, नौ आरपीजी शेल, 23 हैंड ग्रेनेड, 40 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, छह नंबर 27 डेटोनेटर, 300 ब्लास्टिंग कैप, करीब 15 किलो वजन के सात देसी बम, सात कम्युनिकेशन डिवाइस और 342 राउंड गोला बारूद भी बरामद किए गए.
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पुनर्वास योजना के तहत हर आत्मसमर्पण करने वाले कैडर को एक बार में चार लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी, जिसे तीन साल तक फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में रखा जाएगा. साथ ही हर महीने छह हजार रुपये का भत्ता भी दिया जाएगा. यह सभी कैडर तीन साल तक पुनर्वास कैंप में रहेंगे और वहां उन्हें रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी.
सरकार के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स, सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी के साझा प्रयासों से मुमकिन हो सकी. मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि 3 मई 2023 से पहले मणिपुर में सभी समुदाय शांति से रहते थे, लेकिन जातीय हिंसा के बाद करीब 1,200 हथियार लूटे गए थे. उन्होंने कहा कि बंदूक की संस्कृति से कभी अच्छा समाज नहीं बन सकता और हिंसा से किसी समस्या का स्थायी हल नहीं निकलता.
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