कर्नाटक की कांग्रेस सरकार अपनी प्रमुख योजनाओं के कामकाज और उनके असर का आकलन करने जा रही है. इसमें सरकार की गारंटी योजनाएं भी शामिल होंगी. सरकार यह जानने के लिए लोगों की राय जुटाएगी कि इन योजनाओं को किस तरह लागू किया जा रहा है. इनका लोगों पर कितना असर पड़ रहा है. इस काम के लिए ‘K Monitor’ नाम से सर्वे कराने की योजना को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है.
इस सर्वे पर करीब 14 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. इसके जरिए राज्य की सभी 224 विधानसभा सीटों पर लोगों से उनकी राय ली जाएगी. सरकार इस फीडबैक के आधार पर अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रभाव का मूल्यांकन करेगी.
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दो चरणों में होगा सर्वे
डीके शिवकुमार सरकार ने सर्वे को दो चरणों में कराने की योजना बनाई है. पहले चरण में एक लाख लोगों के सैंपल के आधार पर सर्वे किया जाएगा. इसके बाद दूसरे चरण में सभी विधानसभा क्षेत्रों में 60 हजार लोगों के सैंपल के साथ सर्वे कराया जाएगा.
इस प्रक्रिया के तहत लोगों की राय जुटाकर सरकारी योजनाओं के कामकाज और उनकी प्रभावशीलता को समझने की कोशिश की जाएगी. इसमें गारंटी योजनाओं को लेकर भी फीडबैक लिया जाएगा.
सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों पर नजर
कर्नाटक सरकार का यह सर्वे पूरे राज्य में कराया जाएगा. सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों को इसमें शामिल करने की योजना है, ताकि अलग-अलग इलाकों से लोगों की राय मिल सके. ‘K Monitor’ के जरिए सरकार योजनाओं को लागू करने के तरीके और उनके असर से जुड़ी जानकारी जुटाएगी.
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कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस सर्वे को दो चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा. इस पर करीब 14 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. सरकार का यह कदम प्रमुख योजनाओं के मूल्यांकन और उनके बारे में जनता की राय जानने के लिए उठाया जा रहा है.
सगाय राज