बाबरी मस्जिद विध्वंस जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस लिब्रहान का निधन, 87 की उम्र में ली अंतिम सांस

जस्टिस मनमोहन सिंह लिबरहान का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है. वे बाबरी मस्जिद विध्वंस जांच आयोग के प्रमुख रहे थे. उन्होंने 1964 में वकालत शुरू की और बाद में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के जज बने. वे मद्रास हाईकोर्ट और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे. 1992 में उन्हें बाबरी मस्जिद मामले की जांच का जिम्मा सौंपा गया था.

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बाबरी मस्जिद जांच आयोग के अध्यक्ष रहे जस्टिस एमएस लिबरहान का निधन (Photo: ITG) बाबरी मस्जिद जांच आयोग के अध्यक्ष रहे जस्टिस एमएस लिबरहान का निधन (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:47 PM IST

जस्टिस मनमोहन सिंह लिबरहान का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है. जस्टिस लिबरहान वही जज थे जिन्होंने अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच के लिए बनाए गए आयोग की अगुवाई की थी. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सूद ने बताया कि जस्टिस लिबरहान का रविवार को निधन हुआ. 

जस्टिस लिबरहान ने अपने वकालत के करियर की शुरुआत 1964 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से की थी. इसके बाद अगस्त 1970 में वे पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल के लिए चुने गए और 11 फरवरी 1987 तक इस पद पर बने रहे. जनवरी 1976 से जून 1983 तक उन्होंने बार काउंसिल के सचिव के तौर पर भी काम किया.

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11 फरवरी 1987 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का जज बनाया गया. इसके बाद उनके करियर में एक बड़ा मोड़ आया जब 7 जुलाई 1997 को उन्हें मद्रास हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया. कुछ समय बाद 28 फरवरी 1998 को वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने.

यह भी पढ़ें: 'बाबरी मस्जिद नहीं गिरानी चाहिए थी, ये कहना एंटी नेशनल कैसे' बॉम्बे HC ने ऐसा क्यों कहा?

जस्टिस लिबरहान का नाम देशभर में सबसे ज्यादा बाबरी मस्जिद विध्वंस जांच आयोग की वजह से जाना जाता है. 16 दिसंबर 1992 को उन्हें इस एक सदस्यीय जांच आयोग का प्रमुख बनाया गया था. इस आयोग का काम अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना के पीछे की परिस्थितियों की जांच करना था. यह मामला देश के सबसे बड़े और सबसे लंबे समय तक चले जांच मामलों में गिना जाता है.

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उनके निधन की खबर से कानूनी जगत में शोक की लहर है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने उनके योगदान को याद करते हुए दुख जताया है. उनका करियर कई दशकों तक फैला रहा जिसमें उन्होंने वकालत से लेकर कई बड़े पदों तक का सफर तय किया.

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