Exclusive: '6 महीने की जंग के बाद भी अमेरिका के आगे नहीं झुका ईरान', बोले राष्ट्रपति पेजेश्कियान

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आजतक से खास बातचीत में अमेरिका के साथ संघर्ष और युद्ध के छह महीने बाद ईरान की स्थिति पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद थी कि हमले और शीर्ष नेताओं की हत्या के बाद ईरान कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन हुआ इसका उलटा.

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ईरान कमजोर नहीं हुआ, और मजबूत हुआ (Photo-ITG) ईरान कमजोर नहीं हुआ, और मजबूत हुआ (Photo-ITG)

गीता मोहन

  • नई दिल्ली ,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने 'आजतक' से खास बातचीत की. आजतक की ग्रुप एडिटर (फॉरेन अफेयर्स) गीता मोहन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि छह महीने चले युद्ध के बावजूद ईरान कमजोर नहीं हुआ, बल्कि इस संकट ने देश को और ज्यादा एकजुट किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बिना किसी उकसावे के ईरान पर हमला किया, क्योंकि उसे अपनी सैन्य ताकत पर भरोसा था.

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पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिका को लगा था कि वह वेनेजुएला की तरह ईरान में भी अपनी सरकार स्थापित कर सकता है. उसे उम्मीद थी कि ईरान के नेताओं और सैन्य कमांडरों को शहीद किए जाने के बाद देश कमजोर पड़ जाएगा और जनता सरकार से दूर हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसके उलट, ईरानी जनता सरकार और देश के साथ मजबूती से खड़ी हो गई.

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उन्होंने आगे कहा कि ईरान की सेना और सुरक्षा बलों ने भी पूरी ताकत के साथ जवाब दिया, अमेरिका और उसके सहयोगियों ने अत्याधुनिक तकनीक और सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया, लेकिन इसके बावजूद ईरान डटा रहा. ईरान की सरकार को कमजोर करने की कोशिश नाकाम रही और इस पूरे संकट ने ईरानी समाज को पहले से कहीं ज्यादा एकजुट कर दिया.

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राष्ट्रपति पद संभालने के बाद 2024 में मसूद पेजेशकियान की भारत यात्रा उनकी पहली BRICS शिखर सम्मेलन यात्रा है. यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अगस्त के अधिकांश समय तक चली लड़ाई में थोड़े समय के विराम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर एक-दूसरे के खिलाफ हमले शुरू हो गए हैं. ताजा संघर्ष के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का मुद्दा है. यह एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है.

संघर्ष के बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे हैं. साथ ही, भारत ने खाड़ी देशों के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को भी बरकरार रखा है, जिनमें से अधिकांश पर तेहरान की ओर से हमले किए गए हैं.

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