भारत खरीदेगा 2.38 लाख करोड़ के हथियार, S-400 और ड्रोन्स पर फोकस

भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में धनुष गन सिस्टम, रूसी S-400 मिसाइल और घातक स्ट्राइक ड्रोन्स समेत कई आधुनिक हथियारों के बेड़े को हरी झंडी मिली. इस डील का मकसद थल सेना, वायुसेना और कोस्ट गार्ड को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना और सरहद पर निगरानी तंत्र को और मजबूत बनाना है.

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा एलान, सेना होगी हाईटेक (PTI/File Photo) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा एलान, सेना होगी हाईटेक (PTI/File Photo)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:10 PM IST

भारतीय सेना की ताकत और मारक क्षमता को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए सरकार ने शुक्रवार को अपना खजाना खोल दियाहै. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई 'रक्षा अधिग्रहण परिषद' (DAC) की बैठक में 2.38 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश अपनी सैन्य तैयारियों को आधुनिक और स्वदेशी बनाने पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है.

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राजनाथ सिंह ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बात की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इन प्रस्तावों को 'आवश्यकता की स्वीकृति' (AoN) मिल गई है, जो सेना, वायुसेना और कोस्ट गार्ड की युद्धक क्षमताओं को कई गुना बढ़ा देंगे. राजनाथ सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए यह भी बताया कि इस वित्तीय वर्ष में रक्षा सौदे और मंजूरियां अब तक के सबसे ऊंचे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं.

दुश्मनों के छूटेंगे पसीने

इस महाडील का एक बहुत बड़ा हिस्सा भारतीय थल सेना के आधुनिकीकरण पर खर्च होगा. इसमें सबसे खास है 'धनुष गन सिस्टम', जिसे अब और भी बड़े स्तर पर बेड़े में शामिल किया जाएगा. यह तोप लंबी दूरी तक एकदम सटीक निशाना लगाने में माहिर है और दुर्गम इलाकों में भी दुश्मन के छक्के छुड़ा सकती है. इसके साथ ही, टैंकों के लिए खास 'आर्मर्ड पियर्सिंग' गोला-बारूद भी खरीदा जाएगा, जो दुश्मन के सबसे मजबूत टैंकों को भी लोहे के चने चबवा देगा.

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मैदान-ए-जंग में बेहतर तालमेल के लिए हाई कैपेसिटी रेडियो रिले सिस्टम और हवाई खतरों से निपटने के लिए एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी गई है. इतना ही नहीं, दुर्गम इलाकों में निगरानी रखने के लिए ऐसे ड्रोन खरीदे जा रहे हैं जिन्हें उड़ने के लिए किसी रनवे की जरूरत नहीं होगी. इससे सीमा पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखना और भी आसान हो जाएगा.

वायुसेना के लिए भी यह बैठक किसी बड़े तोहफे से कम नहीं रही. पुराने हो चुके AN-32 और IL-76 मालवाहक विमानों की जगह अब नए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लिए जाएंगे. साथ ही, आसमान का सबसे बड़ा शिकारी माना जाने वाला रूसी मिसाइल सिस्टम S-400 भी वायुसेना के बेड़े में शामिल होगा, जो दुश्मन की मिसाइल या विमान को सैकड़ों किलोमीटर दूर ही ढेर कर देगा. इसके अलावा, हमलावर ड्रोन और सुखोई-30 के इंजन ओवरहॉलिंग को भी मंजूरी मिली है.

समुद्री सुरक्षा की बात करें तो भारतीय कोस्ट गार्ड के लिए हैवी ड्यूटी एयर कुशन व्हीकल्स को मंजूरी दी गई है. ये वाहन समुद्र की लहरों पर तेज रफ्तार से गश्त करने, खोज और बचाव अभियान चलाने और रसद पहुंचाने में बहुत काम आएंगे. राजनाथ सिंह ने बताया कि साल 2025-26 में अब तक 6.73 लाख करोड़ के 55 प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है, जो अपने आप में एक इतिहास है. साफ है कि सरकार बदलती वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत को एक अजेय सैन्य शक्ति बनाने के मिशन पर तेजी से आगे बढ़ रही है.

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