आज के वक्त में युवा सिर्फ किसी ट्रेंड या ऐड को देखकर खरीदारी नहीं करते. प्रोडक्ट की क्वालिटी, कीमत, ब्रांड पर भरोसा और खुद जानकारी जुटाना भी उनके फैसलों का अहम हिस्सा बन गया है. खासकर Gen Z के कंजम्पशन बिहेवियर में ये बदलाव साफ दिखाई दे रहा है. रुकम कैपिटल की नई स्टडी बताती है कि जेन जी खरीदारी में टेक्नोलॉजी और AI का इस्तेमाल तो कर रही है, लेकिन अंतिम फैसला अपने हाथ में रखना चाहती है.
क्वालिटी और कीमत सबसे जरूरी
‘Gen Z: अ डीप डाइव इंटू इंडियाज़ मोस्ट इन्फ्लुएंशियल कंज्यूमर कोहोर्ट' नाम की इस स्टडी के मुताबिक, 82% Gen Z कंज्यूमर्स ब्रांड्स से ईमानदारी और ट्रांसपेरेंसी की उम्मीद करते हैं. वहीं, 51% के लिए क्वालिटी खरीदारी का सबसे बड़ा फैक्टर है, जबकि 49% के लिए कीमत अहम है.
त्योहारों के दौरान भी जेन जी की स्पेंडिंग यानी खर्च बढ़ती है. 60% रिस्पॉन्डेंट्स ने कहा कि वे फेस्टिव सीजन में ज्यादा खर्च करते हैं. गिफ्टिंग में परिवार सबसे आगे है और 74% की पसंद में माता-पिता और परिवार शामिल हैं. वहीं, फेस्टिव खरीदारी के लिए 41% के साथ ऑनलाइन सर्च सबसे बड़ा इंस्पिरेशन सोर्स है. हर चार में से एक रिस्पॉन्डेंट गिफ्ट आइडिया के लिए AI का इस्तेमाल करता है, जबकि 30% सेल्फ-गिफ्टिंग और 50% हेल्दी स्नैकिंग को लेकर रुचि दिखाते हैं.
शॉपिंग में AI, लेकिन कंट्रोल खुद का
AI अब Gen Z की शॉपिंग जर्नी का भी हिस्सा बन रहा है. करीब 10 में से 6 Gen Z कंज्यूमर्स प्रोडक्ट रिसर्च के लिए AI का इस्तेमाल करते हैं. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रोडक्ट्स की तुलना, ऑप्शंस को समझने और कीमतें पता करने के लिए किया जाता है. हालांकि, 70% लोग AI की सिफारिशों को लेकर सहज हैं, लेकिन सिर्फ 49% AI को अपनी मंजूरी के बिना फैसला लेने देना चाहते हैं.
AI का इस्तेमाल सिर्फ शॉपिंग तक सीमित नहीं है. 66% Gen Z हेल्थकेयर से जुड़े फैसलों के लिए AI का इस्तेमाल करते हैं या ऐसा करने पर विचार कर रहे हैं, जबकि 63% करियर गाइडेंस के लिए AI को लेकर ऐसा ही रुख रखते हैं.
इंफ्लुएंसर से ज्यादा खुद की रिसर्च पर भरोसा
स्टडी में ट्रस्ट को लेकर भी दिलचस्प तस्वीर सामने आई. 27% के साथ खुद की रिसर्च सबसे बड़ा ट्रस्ट सोर्स रही. इसके बाद दोस्त 20% और रिव्यूज 15% पर रहे. सोशल मीडिया और क्रिएटर्स 29% लोगों के लिए डिस्कवरी का जरिया हैं, लेकिन सिर्फ 6% लोग क्रिएटर की सिफारिश के तुरंत बाद खरीदारी करते हैं.
Gen Z ब्रांड्स की बनावटी कोशिशों को लेकर भी सतर्क है. करीब 30% ने इंफ्लुएंसर ओवरयूज, जबरदस्ती स्लैंग या जरूरत से ज्यादा ट्रेंड-चेजिंग को ब्रांड की इमेज खराब करने वाला व्यवहार माना. वहीं, सिर्फ 6% पर्सनलाइज्ड मार्केटिंग को नापसंद करते हैं, जबकि रिलेटेबल और एंगेजिंग कंटेंट को ज्यादा पसंद किया जाता है.
खरीदने से पहले वैलिडेशन जरूरी
Gen Z के खरीदारी व्यवहार में रिसर्च की भूमिका भी बढ़ी है. 46% लोगों ने कहा कि वे खरीदने से पहले पहले से ज्यादा रिसर्च करते हैं, जबकि सिर्फ 4% प्रोडक्ट डिस्कवर करने के तुरंत बाद खरीदारी करते हैं. फेक या डीपफेक कंटेंट की चिंता के चलते 32% सेलर को वेरिफाई करते हैं, जबकि 29% पहले से भरोसेमंद स्थापित ब्रांड्स को प्राथमिकता देते हैं.
करीब 28% लोग क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल करते हैं, यानी जरूरत की चीजें जल्दी मंगाना पसंद करते हैं. वहीं 20% लोगों का कहना है कि वे अब पहले से ज्यादा अचानक या बिना ज्यादा सोचे खरीदारी कर लेते हैं..
ये स्टडी यूगोव ने रुकम कैपिटल के साथ मिलकर की है, जिसमें भारत के 18 राज्यों से 18-29 साल की उम्र के 4,002 जेन जी रिस्पॉन्डेंट्स शामिल थे.
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