लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार की मंशा पर तीखे सवाल उठाए हैं. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए 2024 के कानून में संशोधन हेतु ये बिल लाया गया है.
वहीं, दूसरी ओर गौरव गोगोई ने मास्टरमाइंड संजीव मुखिया और अमित कुमार बरुआ जैसे आरोपियों को जमानत मिलने का जिक्र करते हुए इस कानून को सरकार की विफलता पर सवाल उठाया और कहा कि ये बिल सिर्फ दिखावे का बिल है. क्योंकि ये सिर्फ एक संशोधन बिल है.
दरअसल, सदन में बिल पेश करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने 2009 के रेलवे भर्ती और 2012 के एम्स प्रवेश परीक्षा पेपर लीक का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और यूपीए सरकारों ने केंद्रीय परीक्षा कमेटी गठन के सुझावों को खारिज किया, जबकि मोदी सरकार ने एनटीए का गठन कर जून 2024 में पारदर्शी कानून लागू किया. प्रधानमंत्री के निर्देश पर अब 2024 के बिल को और अधिक मजबूत बनाने के लिए संशोधन लाया गया है. इस विधेयक के जो मूल उद्देश्य थे, वह परीक्षा में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना था. जितेंद्र सिंह ने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी.
NTA पर एक्शन पर भी उठाया सवाल
जितेंद्र सिंह के बाद बोलते हुए कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने एनटीए पर हुए सरकार के एक्शन की पोल खोल दी. उन्होंने पूछा कि जब एनटीए में मात्र 37 पद ही मंजूर थे, तो सरकार ने 47 लोगों को कैसे हटा दिया. गोगोई ने कहा कि ये बिल वास्तविक सुधार लाने के लिए नहीं है, बल्कि सिर्फ एक दिखावे का बिल है.
46 आरोपियों में से 44 को मिली बेल
गोगोई ने 2026 के एक समाचार पत्र के आर्टिकल का हवाला देते हुए बताया कि 2024 नीट पेपर लीक मामले में चार्जशीटेड 46 में से 44 आरोपियों को बेल मिल चुकी है. उन्होंने कहा कि 11 महीने फरार रहने वाला मास्टरमाइंड संजीव मुखिया और अमित कुमार बरुआ उर्फ अमित कुमार सिंह जमानत पर बाहर हैं. गोगोई ने कहा कि ये कानून उस वक्त भी विफल था और आज भी विफल साबित होगा.
'पुलिस ने आंदोलन को कुचला'
गौरव गोगोई ने प्रोटेस्ट के दौरान हुई घटनाओं का उल्लेख किया और कहा कि डर गायब हो गया. लोग 20 जुलाई की रात 10 बजे प्रोटेस्ट में पहुंचे कि मैं भी एक लाठी खा लूंगा. हमें आपने याद दिलाया कि लोकतंत्र है. खून से लथपथ चेहरे के बावजूद एक लड़का पुलिस को ललकार रहा था. बहुत लोग कहते हैं कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में गलत शब्द भी कहे गए. उन शब्दों का समर्थन नहीं कहा, लेकिन उन शब्दों को भी याद करना चाहिए जो उन बच्चों ने याद दिलाया. वसीम बरेलवी की कविता- उसूलों पर आंच आए, तो टकराना जरूरी है. जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है. पुलिस की लाठी आती है तो कोई अनजाना सामने आकर लड़की को बचाता है. वह लड़का कहता है कि इसी उंगली से हमने कमल को वोट डाला, आज कमल की पुलिस ने उस उंगली को तोड़ डाला. धन्यवाद देना चाहता हूं कि देशभर से लोगों ने स्विगी के जरिये खाना भिजवाया. वकीलों ने बोला कि लोकतंत्र के साथ यहां पर खड़े हैं. हमने लोकतंत्र की ताकत देखी, वहीं हमने इस सरकार की क्रूरता भी देखी. हमने देखा कि किस प्रकार से पैलेट गन का इस्तेमाल किया, हमने ये भी देखा कि किस तरह से पुलिसकर्मी ने लड़की के गाल पर थप्पड़ मारा. एक बच्ची के प्राइवेट पार्ट पर हमला किया. हम भूलेंगे नहीं. हम गृह मंत्री का जवाब चाहते हैं. ये बिल इसलिए आया है, क्योंकि आपकी पुलिस इस आंदोलन को कुचल नहीं पाई. बिहार में आपकी पुलिस ने एके-47 का इस्तेमाल किया.
आपको बता दें कि एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के लिए पहले छह घंटे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन विपक्षी सदस्यों द्वारा चर्चा का समय बढ़ाने की मांग के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार 10 घंटे भी चर्चा के लिए तैयार है. इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की सहमति से चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय कर दिया.
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