खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका तक... विदेशी मंत्री जयशंकर करेंगे 6 देशों का दौरा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार से छह देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना होंगे. वह कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, अमेरिका और बेल्जियम की यात्रा करेंगे. खाड़ी देशों के दौरे के दौरान क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा होगी.

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने इस दौरे में अमेरिका, कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान और बेल्जियम जाएंगे. (File Photo: PTI) विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने इस दौरे में अमेरिका, कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान और बेल्जियम जाएंगे. (File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:56 PM IST

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार से छह देशों की अहम यात्रा पर रवाना होंगे. वह कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, बेल्जियम और अमेरिका का दौरा करेंगे. विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, जयशंकर की यह यात्रा 5 जुलाई से शुरू होकर 15 जुलाई तक चलेगी. विदेश मंत्री की खाड़ी देशों की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद पश्चिम एशिया की राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है.

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जयशंकर 5 से 10 जुलाई के बीच कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान का दौरा करेंगे. इस दौरान वह इन देशों के विदेश मंत्रियों और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे. विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य चारों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है. इसके अलावा क्षेत्रीय घटनाक्रम और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा. खाड़ी देशों की यात्रा पूरी करने के बाद जयशंकर अमेरिका के न्यूयॉर्क जाएंगे, जहां 13 जुलाई को वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे. 

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इसके बाद विदेश मंत्री जयशंकर बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स पहुंचेंगे. वहां वह 14 और 15 जुलाई को आयोजित होने वाली भारत-यूरोपीय संघ (India-EU) ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की तीसरी बैठक में हिस्सा लेंगे. इस दौरान जयशंकर यूरोपीय संघ और बेल्जियम के अपने समकक्षों के साथ भी बैठक करेंगे. भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की शुरुआत 2022 में की गई थी. इसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है.

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भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और यह अभियान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. भारत के लिए खाड़ी देश रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक वहां काम करते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से पूरा होता है. जयशंकर की यह यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता और बहुपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित हो सकती है.

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