दिल्ली: गड्ढे में गिरकर बाइक सवार की मौत के बाद एक्शन, ठेकेदार और जल बोर्ड के अफसरों पर FIR

दिल्ली के जनकपुरी इलाके में जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गहरे गड्ढे में गिरकर 25 साल के बैंक कर्मी कमल ध्यानी की मौत हो गई. पर्याप्त रोशनी और चेतावनी बोर्ड न होने के कारण हादसा हुआ. परिवार रातभर पुलिस थानों के चक्कर काटता रहा, लेकिन समय पर मदद नहीं मिली. मामले में पुलिस ने एक्शन लेते हुए दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों और कॉन्ट्रैक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है.

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जनकपुरी में जल बोर्ड के खुले गड्ढे में गिरकर बैंक कर्मी कमल ध्यानी की मौत (Photo: ITG) जनकपुरी में जल बोर्ड के खुले गड्ढे में गिरकर बैंक कर्मी कमल ध्यानी की मौत (Photo: ITG)

अरविंद ओझा / हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:28 PM IST

नोएडा में गड्ढे में डूबकर हुई सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत को अभी सिर्फ 20 दिन ही गुज़रे थे. धीरे-धीरे दिल्ली-NCR में सिस्टम को लगा कि मामला आया-गया हो गया. और फिर सिस्टम चादर तानकर सो गया. ना कोई सबक लिया गया, ना ही कोई सुधार किया गया. और अब दिल्ली में लापरवाही का गड्ढा एक और व्यक्ति को लील गया.

25 साल के कमल ध्यानी एक प्राइवेट बैंक में असिस्टेंट मैनेजर थे. दिल्ली के जनकपुरी इलाके में अपने दफ्तर से घर लौट रहे थे. लेकिन उन्हें क्या पता था कि सड़कों पर ‘विकास’ के नाम पर मौत के गड्ढे खोदे हुए हैं. 

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इस मामले में कॉन्ट्रैक्टर और दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. BNS की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

10 मिनट में घर पहुंचने का वादा, जो कभी पूरा नहीं हुआ

कमल ध्यानी ने रात करीब पौने 12 बजे अपने घर फोन किया और कहा कि वह 10 मिनट में घर पहुंच रहे हैं. लेकिन वो 10 मिनट कभी खत्म ही नहीं हुए. क्योंकि जोगिंदर सिंह मार्ग पर दिल्ली जल बोर्ड का एक गहरा गड्ढा उनकी राह देख रहा था. बैरिकेडिंग के दावों के बावजूद कमल अपनी अपाचे बाइक के साथ सीधे उस गड्ढे में जा गिरे.

अंधेरा, गड्ढा और लापरवाह सिस्टम

पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की कमी और अचानक आए खुले गड्ढे ने कमल को संभलने का मौका ही नहीं दिया. गड्ढा इतना गहरा था कि कमल और उनकी बाइक पूरी तरह उसमें समा गए. हेलमेट पहनने के बावजूद गंभीर चोटों और समय पर मदद न मिलने के कारण उनकी जान चली गई.

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न बैरिकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड

आरोप है कि जिस जगह काम चल रहा था, वहां न तो कोई ढंग की बैरिकेडिंग थी और न ही अंधेरे में चेतावनी देने वाला कोई साइन बोर्ड. कमल ध्यानी के परिवारवालों का कहना है कि वे उन्हें ढूंढने के लिए पूरी रात जनकपुरी, सागरपुर, विकासपुरी और रोहिणी समेत दिल्ली के अलग-अलग थानों के चक्कर काटते रहे.

यह भी पढ़ें: दिल्ली में 'मौत के गड्ढे' में गिरकर कमल की मौत, रात में थाने पहुंचे घरवाले तो पुलिस बोली- सुबह आना 

सड़क के बीच खोदा गया गड्ढा बना मौत की वजह, FIR में जल बोर्ड की लापरवाही दर्ज

जनकपुरी गड्ढा हादसे में दिल्ली पुलिस ने BNS की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया है. FIR के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सड़क के बीच बिना सुरक्षा इंतजाम और चेतावनी चिन्ह लगाए गहरा गड्ढा खोदा गया था. रात में रोशनी की व्यवस्था नहीं थी, जिससे बाइक सवार उसमें गिर गया. घायल को फायर ब्रिगेड की मदद से बाहर निकालकर DDU अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई. अब तक कोई चश्मदीद सामने नहीं आया है.

पुलिस की उदासीनता पर गंभीर सवाल

आरोप है कि पुलिस लोकेशन ट्रेस करने का दावा करती रही, लेकिन मौके पर जाने की जहमत नहीं उठाई. अगर पुलिस रात में ही सक्रिय हो जाती तो शायद कमल की जान बच सकती थी. मामला जब सुर्खियों में आया तो दिल्ली सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए दिल्ली जल बोर्ड के तीन अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया. दिल्ली पुलिस ने लापरवाही से मौत की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है.

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नोएडा से दिल्ली तक, वही कहानी दोहराई गई

कुछ दिन पहले नोएडा में युवराज की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. प्रशासन के सामने युवराज की डूबकर मौत हो गई. लेकिन इस देश में इंसान की मौत की कोई कीमत नहीं है. बस नाम, जगह और सरकार बदल जाती है. अब देश की राजधानी दिल्ली से आई खौफनाक तस्वीर ने सिस्टम पर बड़ा सवाल एक बार फिर से खड़ा कर दिया है. कार्रवाई और एक्शन की खानापूर्ति शुरू हो गई है. सियासत चमकाने का दौर शुरू हो चुका है.

कार्रवाई नहीं, सिर्फ खानापूर्ति

आखिर किसे-किसे दोष देंगे. बीच सड़क पर गड्ढा खोदने वाले जल बोर्ड को, जिसमें गिरकर एक इंसान ने अपनी जान गंवा दी. या फिर देश की राजधानी के उन सात पुलिस थानों को, जिनके पास एक शख्स को ढूंढने का टाइम नहीं था. या फिर उन नेताओं को, जो चुनाव के वक्त बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जनता को भगवान भरोसे छोड़कर सियासी खेल में जुट जाते हैं.

रोज़ की वही सड़क, आखिरी सफर बन गई

कमल रोहिणी में बैंक के एक कॉल सेंटर में काम किया करता था. ये वही सड़क थी, जहां से कमल रोज अपने दफ्तर आता-जाता था. लेकिन उसे नहीं पता था कि एक दिन जल बोर्ड वाले बिना बैरिकेडिंग के इतना बड़ा गड्ढा खोदकर चले जाएंगे, जो उसका आखिरी सफर बन जाएगा. घरवालों से 10 मिनट में घर पहुंचने की बात करने वाला कमल फिर कभी घर नहीं पहुंच सका. और ये कॉल उसकी आखिरी कॉल थी.

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खुले गड्ढे में गिरे एक मोटरसाइकिल सवार की बाइक को बाहर निकाला जा रहा (Photo: PTI)

चीखें जो अंधेरे में दब गईं

जनकपुरी में जल बोर्ड के इस गड्ढे ने कमल की जिंदगी छीन ली. बाइक के साथ कमल गड्ढे में गिरा और तड़प-तड़प कर खत्म हो गया. ना तो उसकी चीख सुनी गई, ना ही उसकी आवाज आई. हो सकता है वो करीब 10 फीट गहरे गड्ढे से मदद के लिए गुहार लगाता रहा हो, लेकिन रात के अंधेरे में उसकी आवाज कहां पहुंचती. क्योंकि यहां तो पूरा सिस्टम अंधा और बहरा है.

हादसा या सिस्टम की हत्या

अब इसे क्या कहें, हादसा या हत्या. सिस्टम के हाथों हत्या. हैरानी इस बात की है कि दिल्ली जल बोर्ड ने गड्ढा खोद तो दिया, लेकिन ना तो ठीक से बैरिकेडिंग की और ना ही चेतावनी बोर्ड लगाने की जहमत उठाई. बस भगवान भरोसे छोड़ दिया. जो बच गया वो किस्मत वाला, जो नहीं बच पाया वो बदकिस्मत.

मंत्री उसी इलाके के विधायक, फिर भी सिर्फ निलंबन

सबसे बड़ी बात ये है कि दिल्ली जल बोर्ड के मंत्री आशीष सूद इसी इलाके जनकपुरी के विधायक भी हैं. लेकिन सरकार ने एक्शन के नाम पर दो-तीन अधिकारियों को हटाकर पल्ला झाड़ लिया.

मंत्री बता रहे हैं कि एक्शन की खानापूर्ति कर दी गई है. लेकिन कोई पूछे कि क्या इस एक्शन के बाद ये सब रुक जाएगा. जवाब है नहीं. अधिकारियों को भी पता है कि इसी तरह की खानापूर्ति ने ही उनके हौसले बुलंद कर रखे हैं.

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गैर-इरादतन हत्या का मामला क्यों नहीं?

सवाल ये है कि आखिर गैर-इरादतन हत्या का मामला अधिकारियों पर क्यों नहीं दर्ज होना चाहिए. आखिर उन सात थानों और उनकी पुलिस के खिलाफ केस क्यों नहीं दर्ज होना चाहिए, जो पूरी रात एक पीड़ित परिवार को टहलाते रहे. 

बलि का बकरा और वही पुरानी स्क्रिप्ट

सरकार बताए कि जल मंत्री आशीष सूद पर एक्शन क्यों नहीं लिया जाना चाहिए. यही सिस्टम है, जो हर सरकार में एक ही तरह से काम करता है. बस ढूंढा जाता है एक बलि का बकरा और लिखी जाती है एक्शन की खानापूर्ति वाली स्क्रिप्ट. क्योंकि यही सिस्टम है, जहां इंसान की जान की कोई कीमत नहीं. फिर चाहे वो नोएडा का युवराज हो या दिल्ली का कमल.

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