मैटरनिटी लीव पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब मां बनने पर नौकरी में नहीं घटेगा पद

मैटरनिटी लीव से लौटने वाली महिला कर्मचारीयों के हित में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अब छुट्टी से लौटकर आने पर जिम्मेदारी, वेतन या काम में बदलाव करना हुआ, तो कर्मचारी को पहले ठोस कारण देना होगा.

Advertisement
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारीयों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है.(Photo-ITG) दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारीयों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है.(Photo-ITG)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:20 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा है कि नई मांओं को मातृत्व अवकाश के कारण अपनी नौकरी का दर्जा या पद नहीं गंवाना चाहिए. कोर्ट के मुताबिक, हर महिला कर्मचारी जब मातृत्व अवकाश से वापस आती है, तो उसे सामान्य रूप से वही पद मिलना चाहिए जो वह छुट्टी पर जाने से पहले संभाल रही थी.

Advertisement

अगर किसी कारण से वही डेजिग्नेशन देना संभव न हो, तो  बराबर का पद दिया जाए. इसमें सैलरी, पद का लेवल, वरिष्ठता, जिम्मेदारियां, अधिकार, फैसले लेने की शक्ति और आगे बढ़ने के मौके लगभग वही होने चाहिए. अदालत ने यह भी साफ किया कि सिर्फ गर्भावस्था या छुट्टी के आधार पर किसी महिला की जिम्मेदारियों, अधिकारों या करियर के अवसरों में बदलाव करना भेदभाव माना जाएगा. ऐसा बदलाव तभी जायज होगा जब इसके पीछे ठोस और सही कारण हों, जो मैटर्निटी से जुड़े न हों.

बदलाव से पहले सूचना जरूरी

अगर कंपनी मातृत्व अवकाश के दौरान महिला कर्मचारी की जिम्मेदारियों, वेतन, ग्रेड, रिपोर्टिंग व्यवस्था, टीम या कार्य स्थल में कोई बड़ा बदलाव करना चाहती है, तो उसे पहले कर्मचारी को इसकी जानकारी देनी होगी. साथ ही बदलाव का कारण भी बताना होगा.बिना पूर्व सूचना के ऐसा कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा. यह फैसला उन महिलाओं के लिए राहत भरा है जो मातृत्व अवकाश के बाद लौटने पर पद या जिम्मेदारियों में कटौती का सामना करती हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: पर्सनैलिटी राइट्स मामला: राघव चड्ढा को दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली अंतरिम राहत

कई बार महिलाओं को कम महत्वपूर्ण काम दे दिए जाते हैं या करियर के अवसर सीमित हो जाते हैं. कोर्ट ने ऐसे व्यवहार को रोकने की दिशा में साफ दिशा-निर्देश दिए हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और समानता को बढ़ावा देगा. कंपनियों को अब अपनी नीतियां इस हिसाब से सुधारनी पड़ेंगी ताकि कोई महिला सिर्फ मां बनने के कारण पीछे न रह जाए. अदालत का यह आदेश महिलाओं के करियर और परिवार दोनों में बैलेंस बनाने में मददगार साबित हो सकता है. अब नई मांओं को यह भरोसा मिल सकेगा कि वे छुट्टी के बाद भी उसी सम्मान और अवसर के साथ काम पर लौट सकेंगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »