दिल्ली जिमखाना क्लब को लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस से मिला नोटिस, संबंधित लोगों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का दिया निर्देश

दिल्ली के जिमखाना क्लब को भूमि एवं विकास कार्यालय से शो-कॉज नोटिस मिलने से सदस्यों और कर्मचारियों में निराशा फैल गई है. क्लब को 29 जून को जारी इस नोटिस में सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदारों का eviction) अधिनियम, 1971 के तहत खाली करना का आदेश क्यों नहीं पारित किया जाना चाहिए, इसका जवाब मांगा गया है.

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जिमखाना क्लब के सदस्यों ने सरकार की नोटिस पर निराशा जताई है. (Photo: PTI) जिमखाना क्लब के सदस्यों ने सरकार की नोटिस पर निराशा जताई है. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:36 AM IST

लुटियंस दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब को लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (भूमि एवं विकास कार्यालय-L&DO) ने परिसर खाली करने का कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नोटिस में  विभाग ने 7 जुलाई को दोपहर ढाई बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए जवाब के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है. वहीं, नया कानूनी नोटिस मिलने के बाद क्लब प्रबंधन दिल्ली हाईकोर्ट में आगामी सुनवाई के भरोसे अपनी कानूनी लड़ाई को मजबूत करने में जुट गया है.

लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एलएंडडीओ) के एस्टेट ऑफिसर बिपिन कुमार सिंह ने 29 जून को एक कारण बताओ नोटिस जारी कर दिल्ली जिमखाना क्लब से पूछा है कि पब्लिक प्रीमिसेस (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत उनके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए. नोटिस में क्लब और परिसर पर कब्जा रखने वाले सभी संबंधित लोगों को 7 जुलाई तक अपना जवाब देने और उसी दिन दोपहर 2.30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए पेश होने का निर्देश दिया गया है.

बुधवार दोपहर को नया सरकारी नोटिस मिलने के बाद दिल्ली जिमखाना क्लब की लीगल टीम जवाब तैयार करने में पूरी तरह जुट गई है. सदस्यों का कहना है कि ये पूरा मामला पहले से ही दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है, जहां इस विषय पर आगामी 28 जुलाई को अगली महत्वपूर्ण सुनवाई होनी तय है. सदस्यों को पूरा भरोसा है कि इस जटिल विवाद का अंतिम निपटारा केवल न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही हो पाएगा.

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सदस्यों ने जताई निराशा

क्लब के एक वरिष्ठ सदस्य मेजर अतुल देव ने बताया कि सालों से इस संस्थान से जुड़े लोगों के लिए ये नोटिस एक बहुत बड़े झटके और निराशा की तरह आया है. उन्होंने कहा कि ये क्लब केवल मनोरंजन की जगह नहीं है, बल्कि यहां लोग परिवारों के साथ समय बिताते हैं और गहरे रिश्ते बनाते हैं.

एक अन्य सदस्य विजय खुराना ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि खेल और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी कई पीढ़ियां इस क्लब से भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं.

600 से ज्यादा कर्मचारियों की आजीविका पर संकट

उधर, नया लीगल नोटिस मिलने की जानकारी प्राप्त होते ही जिमखाना क्लब वर्कर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नंदन सिंह नेगी अपने गृहनगर से दिल्ली की ओर रवाना हो गए.

उन्होंने बताया कि इस अनिश्चितता के माहौल से क्लब के 600 से ज्यादा कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं और लगातार फोन कर रहे हैं. नेगी ने कहा कि वो दिल्ली पहुंचकर समिति के साथ बैठक करेंगे और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखते हुए आगे का रास्ता तय करेंगे.

लुटियंस दिल्ली के बीचोबीच स्थित दो, सफदरजंग रोड का ये विशाल परिसर मूल रूप से इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड (अब दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड) को एक सामाजिक और खेल क्लब के रखरखाव के लिए लीज पर दिया गया था. ये रणनीतिक और बेहद कीमती भूमि खंड लोक कल्याण मार्ग पर स्थित प्रधानमंत्री आवास के बिल्कुल पास है. ये पूरा इलाका हाई सिक्योरिटी वाले प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां कई महत्वपूर्ण केंद्र सरकार और रक्षा प्रतिष्ठान भी मौजूद हैं.

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