कोयंबटूर सीरियल ब्लास्ट के आतंकी बाशा का हुआ अंतिम संस्कार, भारी फोर्स रही तैनात

कोयंबटूर को दहला देने वाले 1998 के सीरियल ब्लास्ट के मास्टरमाइंड एस ए बाशा के शव को मंगलवार शाम भारी पुलिस सुरक्षा के बीच ले जाया गया और दफनाया गया. बाशा की अंतिम यात्रा में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और परिवार के सदस्यों सहित कई लोग शामिल हुए. इस दौरान 1,500 पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई थी.

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आतंकी एसए बाशा के अंतिम संस्कार के बीच सुरक्षा टाइट आतंकी एसए बाशा के अंतिम संस्कार के बीच सुरक्षा टाइट

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:04 AM IST

1998 में कोयंबटूर को दहला देने वाले सीरियल ब्लास्ट के मास्टरमाइंड एसए बाशा का अंतिम संस्कार कर दिया गया है. उसे उसके होमटाउन में दफनाया गया. इस दौरान आरएएफ समेत भारी पुलिस बलों की तैनाती रही. मास्टरमाइंड बाशा 35 साल से जेल में बंद था और बीमार पड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान 16 दिसंबर को उसकी मौत हो गई थी.

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एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि बाशा की अंतिम यात्रा उसके दक्षिण उक्कड़म स्थित रोज गार्डन वाले घर से शुरू होकर फ्लावर मार्केट स्थित हैदर अली टीपू सुल्तान सुन्नथ जमात मस्जिद तक गई. इस यात्रा में परिवार के सदस्य, कई राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल थे. पुलिस के मुताबिक किसी भी अनहोनी घटना से बचने के लिए 1,500 से ज्यादा पुलिस कर्मियों और रैपिड एक्शन फोर्स की टीम की तैनाती की गई थी.

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58 लोगों की जान लेने वाले धमाकों का था मास्टरमाइंड

84 वर्षीय बाशा की मौत उम्र संबंधी बीमारियों के कारण 16 दिसंबर की शाम को एक प्राइवेट अस्पताल में हुई. इंडियन नेशनल लीग पार्टी के नेता जे रहीम ने कहा, "उसे हाल ही में पैरोल मिली थी और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी मौत हो गई."

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बाशा और 16 अन्य लोगों को अल-उम्मा के साथ 1998 के धमाकों के सिलसिले में उम्रकैद की सजा दी गई थी. ये धमाके 14 फरवरी को हुए थे, जिसमें 58 लोगों की मृत्यु हुई और 231 घायल हुए थे. बाशा अल-उम्मा का संस्थापक अध्यक्ष था और उसने इन बम धमाकों की योजना बनाई थी.

बीजेपी नेताओं की राज्य सरकार से अपील

इस घटना को लेकर तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष के अन्नामलै ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि बाशा को "शहीद" के रूप में प्रस्तुत करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिस को सिर्फ परिवार को अंतिम यात्रा निकालने की अनुमति देनी चाहिए थी, ताकि शांति भंग न हो और सांप्रदायिक तनाव पैदा न हो. 

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तमिलनाडु बीजेपी के उपाध्यक्ष नारायणन थिरुपति ने भी पुलिस से अपील की थी कि वे शव यात्रा की अनुमति न दें, ताकि आतंकवादी को "शहीद" के रूप में सम्मानित करने का गलत संदेश न जाए. उन्होंने कहा कि आतंकवादी या हत्यारे को उनके अंतिम संस्कार का अधिकार है, लेकिन यह शांति से होना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया भी वही भूलें याद दिला सकती है, जिन्होंने 1998 में सांप्रदायिक समस्याओं को जन्म दिया था.

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