'आपके हस्बैंड ठीक होकर घर गए', पति की मौत के 42 दिन बाद पत्नी को आया मैसेज

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक पुलिस कांस्टेबल की मृत्यु के 42 दिन बाद भी आयुष्मान भारत योजना के रिकॉर्ड में उसका इलाज जारी पाया गया.

Advertisement
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज

सुमित सिंह

  • अंबिकापुर,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:07 AM IST

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला एक मामला सामने आया है. अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक पुलिस कांस्टेबल की 42 दिन पहले मृत्यु हो गई लेकिन आयुष्मान भारत योजना के रिकॉर्ड में उसका इलाज जारी बताया गया. ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि 42 दिन बाद मृतक कांस्टेबल की पत्नी के मोबाइल पर मैसेज आया कि मरीज स्वस्थ होकर घर जा रहा है.

Advertisement

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले का है. मामला तब सामने आया, जब मृतक कांस्टेबल की पत्नी के मोबाइल पर आयुष्मान सारथी की ओर से एक मैसेज आया. इस घटना के बाद अस्पताल के रिकॉर्ड और आयुष्मान योजना के तहत दर्ज जानकारी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. 

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं. मृतक कांस्टेबल के परिवार ने इस पूरे मामले की गंभीर जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है. 

यह भी पढ़ें: 'चौथे बच्चे पर कोई मैटरनिटी लीव नहीं'... सरकारी कर्मचारी की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

मृतक कांस्टेबल देवनारायण राम की पत्नी सीमा कुजूर जशपुर जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स के तौर पर काम करती हैं. कुछ दिन पहले उनके फोन पर मैसेज आया कि ‘प्रिय देवनारायण, आप स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं’, यह मैसेज देखकर वह हैरान रह गई. देवनारायण की मौत 42 दिन पहले हो गई थी.

Advertisement

सीमा कुजूर की ओर से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं. उन्होंने सवाल किया है कि आखिर व्यक्ति की मृत्यु के इतने दिन बाद भी रिकॉर्ड में कैसे दिखाया जा सकता है कि उसका इलाज जारी है. उन्होंने इस मामले में जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है. 

अंबिकापुर मेडिकल अस्पताल के डॉक्टर शैलेंद्र गुप्ता ने इस मामले पर सफाई पेश करते हुए कहा कि यह डाटा ऑपरेटर की गलती के कारण हुआ है. उन्होंने कहा, "मरीज का इलाज आयुष्मान कार्ड से चल रहा था. मरीज के परिवार की तरफ से लगाया जा रहा आरोप गलत है. मरीज जितने दिन अस्पताल में भर्ती था उतने ही दिनों की राशि आयुष्मान कार्ड से कटी है. यह चूक डाटा ऑपरेटर से हुई है, उसे कार्ड को बंद कर देना चाहिए था."

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »