क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड केस में करीब 8 साल बाद बड़ी कार्रवाई हुई है. 113 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी के आरोपी अमित लखनपाल को बुधवार देर रात UAE में गिरफ्तार कर लिया गया है. लखनपाल पर निवेशकों को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये ठगने का आरोप है.
दरअसल, आरोपी 2018 में मामला सामने आने के बाद भारत से फरार हो गया था. अब उसकी गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने उसे UAE से वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
लखनपाल की गिरफ्तारी 1 सितंबर को हुई. उसके खिलाफ ठाणे पुलिस के अनुरोध पर रेड नोटिस भी जारी किया गया था. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में उसके खिलाफ जांच शुरू की थी. ED को लखनपाल के UAE में होने की जानकारी मिली थी. यह जानकारी UAE के अधिकारियों के साथ शेयर की गई. इसके बाद उसकी गिरफ्तारी हो सकी.
2018 में India Today के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ था खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा साल 2018 में इंडिया टुडे टीवी और Aajtak की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन 'Operation Bitcoin' के जरिए हुआ था. इंडिया टुडे के रिपोर्टर बड़े निवेशक बनकर ठाणे में मौजूद फ्लिंटस्टोन ग्रुप के ऑफिस पहुंचे थे. यही कंपनी मनी ट्रेड क्वाइन (MTC) से जुड़ी थी.
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स्टिंग ऑपरेशन के दौरान कंपनी के अधिकारियों ने निवेशकों को बड़े मुनाफे का सपना दिखाया था. उन्होंने दावा किया था कि इन्वेस्टमेंट पर चार से छह महीने में 10 से 20 गुना तक रिटर्न मिल सकता है. बड़े निवेशकों को एस्क्रो अकाउंट की सुविधा देने की बात भी कही गई थी.
कंपनी से जुड़े लोगों ने यहां तक दावा किया था कि निवेशकों को कैरेबियन देश की नागरिकता तक दिलाई जा सकती है. यह भी कहा गया था कि MTC को कुछ देशों में कानूनी करेंसी के तौर पर मान्यता मिल सकती है. इन दावों के जरिए लोगों को तेजी से अमीर बनने का सपना दिखाया जा रहा था.
खुलासे के बाद ठाणे पुलिस ने दर्ज की FIR
इंडिया टुडे की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन के बाद ठाणे पुलिस ने जून 2018 में अमित लखनपाल और उसके साथियों के खिलाफ FIR दर्ज की. उस समय लखनपाल देश छोड़कर फरार हो चुका था. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. जांच में इस नेटवर्क से जुड़े कई लोगों की भूमिका भी सामने आई.
उस समय ठाणे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मामले पर कार्रवाई की थी. तत्कालीन ठाणे पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने इस मामले को सामने लाने में इंडिया टुडे ग्रुप की भूमिका को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया था.
ED की जांच के मुताबिक, अगस्त 2017 से अप्रैल 2018 के बीच लोगों को एक ऐसी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के लिए तैयार किया गया, जिसे किसी सरकारी संस्था से मान्यता नहीं मिली थी. इस पूरे मामले में निवेशकों को करीब 113.10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
ED का आरोप है कि लखनपाल ने दिल्ली, पुणे और नासिक में सेमिनार किए. यहां उसने खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकारी बताया. उसने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि मनी ट्रेड क्वाइन को जल्द सरकारी मान्यता मिल जाएगी. साथ ही निवेश पर बड़े रिटर्न का वादा किया गया.
जांच के दौरान ED को कई स्कीम और एक्सचेंज के बारे में जानकारी मिली. इनमें Coin Deposit Ratio, MTC Banque, MTCX India और Cryptozaniya शामिल हैं. एजेंसी का आरोप है कि MTC की कीमतों में हेरफेर किया गया. बाद में ट्रेडिंग और पैसे निकालने की सुविधा भी बंद कर दी गई. इससे निवेशक अपना पैसा वापस नहीं निकाल सके.
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ED ने बताया कि लखनपाल और उसके साथी भारत से फरार हो गए थे. आरोप है कि उन्होंने एंटीगुआ और बारबुडा के पासपोर्ट हासिल किए और दुबई में अलग पहचान के साथ रह रहे थे. 12 अगस्त को ED ने इस मामले में कई जगहों पर तलाशी ली थी. इस दौरान करीब एक करोड़ रुपये कैश, डिजिटल डिवाइस और कई दस्तावेज बरामद किए गए. एजेंसी को शक है कि इनका संबंध कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से है.
अब लखनपाल की UAE में गिरफ्तारी के बाद उसे भारत लाने की तैयारी शुरू हो गई है. सरकार ने संबंधित एजेंसियों से केस की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है. मामले में आगे की जांच जारी है.
दिव्येश सिंह