मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर एक RTI से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. अधिकार कार्यकर्ता जीतेंद्र घाडगे को मिले RTI जवाब के मुताबिक, BMC के 207 अधिकारी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के मामलों में शामिल हैं. इनमें से 112 अधिकारी अभी भी नौकरी में हैं, जबकि 68 अधिकारी अपने मामलों का अंतिम फैसला आने से पहले ही रिटायर हो चुके हैं.
30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, ACB के मामले दर्ज होने के बावजूद 207 में से केवल 27 अधिकारियों को निलंबित किया गया है. यानी भ्रष्टाचार के मामलों का सामना कर रहे करीब 87 फीसदी अधिकारी या तो अभी भी सेवा में हैं या रिटायर हो चुके हैं.
RTI से यह भी सामने आया कि भ्रष्टाचार के कई मामले लंबे समय से लंबित हैं. सबसे पुराने लंबित ACB मामले 2005 के हैं. यानी कुछ मामले 21 साल से ज्यादा समय से अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंच पाए हैं.
इंजीनियरों से जुड़े सबसे ज्यादा मामले
RTI के मुताबिक, BMC के इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े कर्मचारियों की संख्या भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे ज्यादा है. ACB मामलों में 33 सब इंजीनियर, 13 असिस्टेंट इंजीनियर और 13 जूनियर इंजीनियर शामिल हैं. इनके अलावा कई एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और वरिष्ठ इंजीनियरिंग अधिकारी भी मामलों में शामिल हैं. BMC के इंजीनियरिंग विभाग सड़कों, नालियों, इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट संभालते हैं.
RTI के आंकड़े बताते हैं कि भ्रष्टाचार के आरोप सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों तक सीमित नहीं हैं. क्लास-IV कर्मचारियों में 48 सफाई कर्मचारी, 24 मजदूर, 6 मुकादम और 6 चपरासी समेत कई अन्य फील्ड कर्मचारी भी ACB की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं.
मुकदमा चलाने की मंजूरी के प्रस्ताव भी लंबित
RTI में सामने आया कि ट्रैप और रिश्वत के मामलों में मुकदमा चलाने की मंजूरी से जुड़े पांच प्रस्ताव लंबित हैं. इसके अलावा आय से अधिक संपत्ति से जुड़ा एक प्रस्ताव भी कार्रवाई का इंतजार कर रहा है. इनमें से कुछ प्रस्ताव 2024 से लंबित हैं और उनका स्टेटस अभी भी 'In Progress' है. सक्षम अधिकारी से मुकदमा चलाने की मंजूरी के बिना आपराधिक कार्रवाई प्रभावी तरीके से आगे नहीं बढ़ सकती.
कोविड के दौरान 43 निलंबित कर्मचारी हुए थे बहाल
RTI जवाब के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के दौरान पहले निलंबित किए गए 43 नगर निगम कर्मचारियों को दोबारा ड्यूटी पर बहाल किया गया था. क्वारंटीन और इमरजेंसी से जुड़े कामों के लिए कर्मचारियों की जरूरत को इसकी वजह बताया गया. हालांकि, BMC ने इन कर्मचारियों के नाम बताने से इनकार कर दिया. इसके लिए RTI एक्ट के प्रावधानों और लंबित आपराधिक या विभागीय कार्रवाई का हवाला दिया गया.
भ्रष्टाचार के मामले रिटायरमेंट स्कीम नहीं बन सकते
द यंग व्हिसलब्लोअर्स फाउंडेशन के कार्यकर्ता जीतेंद्र घाडगे ने कहा कि केवल 27 अधिकारियों का निलंबित होना, 112 का नौकरी में बने रहना और 68 का मामले खत्म होने से पहले रिटायर हो जाना गलत संदेश देता है. उन्होंने कहा कि जांच में देरी भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों के उद्देश्य को कमजोर करती है. भ्रष्टाचार के मामले ऐसी 'रिटायरमेंट स्कीम' नहीं बन सकते, जिसमें अधिकारी केवल समय बीतने का इंतजार करें. उन्होंने सभी लंबित ACB मामलों की तय समय सीमा में निगरानी, मुकदमा चलाने की मंजूरी पर जल्द फैसला और कार्रवाई में पूरी पारदर्शिता की मांग की.
दीपेश त्रिपाठी