डिजिटल अरेस्ट गैंग का भंडाफोड, IIT इंजीनियर और बैंक मैनेजर समेत कई अरेस्ट

डिजिटल अरेस्ट के मामले में पुलिस ने इंडसइंड बैंक के ऑपरेशनल मैनेजर और आईटी सेक्टर के एक वेब डेवलपर समेत कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जानकारी के मुताबिक, 1.12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया.

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नागरिकों से डिजिटल अरेस्ट और साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने के लिए जरूरी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है. (Photo: ITG) नागरिकों से डिजिटल अरेस्ट और साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने के लिए जरूरी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है. (Photo: ITG)

दिव्येश सिंह

  • मुंबई,
  • 17 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:06 PM IST

फर्जी सिम कार्ड के जरिए 238 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी पुलिस केस की धमकी देकर डराकर एक मनगढ़ंत मामले में सीनियर नागरिक शिकायतकर्ता को सुप्रीम कोर्ट का फर्जी नोटिस भेजा गया और उसे 'डिजिटल अरेस्ट' किया गया. जिससे 1.12 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया.

इस मामले में मुंबई की नॉर्थ साइबर पुलिस ने इंडसइंड बैंक के ऑपरेशनल मैनेजर और आईटी सेक्टर के एक वेब डेवलपर समेत कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता के खिलाफ दिल्ली में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया है ऐसा कहकर डराया गया. शिकायतकर्ता को डिजिटल रूप से गिरफ्तार कर लिया गया और उससे कुल 1,12,26,000 रुपये की धोखाधड़ी की गई.

एक अत्यंत संवेदनशील अपराध में, आरोपियों ने अपनी पहचान पूरी तरह से छिपा ली, पुलिस अधिकारियों का रूप धारण करने की साजिश रची, पुलिस की वर्दी पहनी और सरकारी अधिकारियों और राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के नाम, मुहर और लेटरहेड का इस्तेमाल किया. शिकायतकर्ताओं को बार-बार गिरफ्तारी की धमकी दी और उनके बैंक खातों से धनराशि हड़पने के लिए वीडियो कॉल किए.

साइबर अपराध के आरोपियों ने धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को अलग-अलग व्यक्तियों और कंपनियों के नाम पर विभिन्न बैंक चालू खातों का उपयोग करके हासिल किया. मुंबई के नॉर्थ साइबर पुलिस स्टेशन की जांच टीम ने उक्त साइबर अपराध की कुशलतापूर्वक, निरंतर और सकारात्मक जांच करते हुए आरोपियों की आपराधिक कार्यप्रणाली को समझा, 

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गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 2 लैपटॉप, 20 मोबाइल फोन, अलग-अलग नामों से 25 बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, आधार कार्ड आदि बरामद किए गए हैं. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में राजेश कुमार, मोहम्मद तारिक,  शिखर, गौरव, अजय कुमार, चिंतनकुमार शामिल हैं. 

इस बीच नागरिकों से अपील की गई है कि डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने के लिए जरूरी निर्देशों का पालन करें.

  • पुलिस/सीबीआई/ईडी/आरबीआई या कोई भी सरकारी एजेंसी डिजिटल गिरफ्तारी नहीं करती है.
  • कानून में डिजिटल गिरफ्तारी का कोई प्रावधान नहीं है.
  • अजनबियों से वीडियो कॉल स्वीकार न करें और कभी भी पैसे न भेजें.
  • परिवार के किसी भी सदस्य के व्यवहार या मनोदशा में होने वाले किसी भी बदलाव पर ध्यान दें. यदि आप डिजिटल गिरफ्तारी के शिकार हैं, तो तुरंत अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों या पुलिस को सूचित करें.
  • यदि आपको डिजिटल अरेस्ट के संबंध में कोई कॉल प्राप्त होती है, तो तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें या सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 100/1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर जाएं.
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