लाखों खर्च किए, अब बाग उखाड़ने पर मजबूर किसान! सूखे की चपेट में महाराष्ट्र का फेमस 'अंगूर हब'

Maharashtra Crop Crisis: जालना का द्राक्ष हब कडवंची सूखे की चपेट में. पानी न होने से 1400 एकड़ में फैली अंगूर की बागें बर्बादी की कगार पर. किसानों ने खडकपूर्णा धरण से पानी देने और मुआवजे की मांग की. पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट...

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1400 एकड़ में फैली अंगूर की फसल पर गहराया संकट.(Photo:ITG) 1400 एकड़ में फैली अंगूर की फसल पर गहराया संकट.(Photo:ITG)

गौरव विजय साली

  • जालना,
  • 04 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:36 PM IST

महाराष्ट्र के जालना का द्राक्ष हब और 'द्राक्षों की पंढरी' के नाम से पहचाना जाने वाला कडवंची गांव इस साल सूखे की मार झेल रहा है. पर्याप्त बारिश नहीं होने से यहां की द्राक्ष बागें संकट में आ गई हैं. किसानों ने बागों पर लाखों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन अब कुओं और खेत तालाबों में पानी कम होने से फसल बचाना मुश्किल हो रहा है. किसानों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो बड़ी संख्या में द्राक्ष बागें सूख सकती हैं.

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जालना तालुका के कडवंची गांव में करीब 1300 से 1400 एकड़ क्षेत्र में द्राक्ष बागें हैं. गांव के ज्यादातर किसान द्राक्ष की खेती पर निर्भर हैं. यहां की द्राक्ष खरीदने के लिए महाराष्ट्र के अलावा छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात से भी व्यापारी आते हैं. लेकिन इस साल बारिश पर्याप्त नहीं होने से हालात बदल गए हैं. खेत तालाब पूरी तरह नहीं भर पाए हैं और कई कुओं ने भी तलहटी पकड़ ली है. ऐसे में किसानों के सामने द्राक्ष बागों के लिए पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है.

छंटाई के सीजन में पानी का संकट

इस समय द्राक्ष बागों की छंटाई का सीजन शुरू हो गया है. किसानों ने बागों पर पहले ही लाखों रुपये खर्च कर दिए हैं. पानी की कमी के कारण कई किसान छंटाई करने से भी पीछे हट रहे हैं. किसानों का कहना है कि पिछले साल अतिवृष्टि के कारण फसल को नुकसान हुआ था और अब बारिश की कमी ने नई परेशानी खड़ी कर दी है.

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किसान कृष्णा क्षीरसागर बताते हैं कि उन्होंने साल 2001 में दो एकड़ में द्राक्ष बाग लगाई थी. धीरे-धीरे बाग बढ़ाते हुए आज वह 17 एकड़ में द्राक्ष की खेती कर रहे हैं. लेकिन इस साल बारिश अच्छी नहीं हुई, नदी में पानी नहीं आया और खेत तालाब भी नहीं भर पाए. उनके खेत तालाब में अब करीब एक महीने का ही पानी बचा है.

कृष्णा क्षीरसागर के मुताबिक, 17 एकड़ द्राक्ष बाग पर अब तक करीब 10 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. बाग से 60 से 65 लाख रुपये तक की आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन पानी की कमी के कारण अब यह आमदनी करीब 10 लाख रुपये तक रह जाने का अंदाजा है. उनका कहना है कि बाग पर करीब 60 प्रतिशत खर्च हो चुका है और बाकी 40 प्रतिशत खर्च करके उत्पादन लेने का समय आया है, लेकिन पानी की समस्या खड़ी हो गई है.

किसान का कहना है कि अगर 10 से 15 दिन में बारिश होती है तो छंटाई करके फसल ली जा सकती है. उन्होंने सरकार से द्राक्ष उत्पादक किसानों की मदद करने और पानी की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है. उनका कहना है कि कडवंची से करीब 18 किलोमीटर दूर खडकपूर्णा धरण से पानी उपलब्ध कराया जाए तो खेती के साथ गांव के लोगों और पशुओं के पीने के पानी की समस्या भी दूर हो सकती है.

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10 एकड़ की बाग पर लाखों का खर्च 

कडवंची के किसान उद्धव क्षीरसागर भी पानी की कमी से परेशान हैं. उनके पास 10 एकड़ में द्राक्ष बाग है. इस बाग पर करीब चार से साढ़े चार लाख रुपये खर्च हुए हैं. इस साल बारिश अच्छी नहीं होने के कारण खेत तालाब नहीं भर पाए और कुएं में भी पानी नहीं है. फिलहाल करीब एक महीने का पानी बचा है.

उद्धव क्षीरसागर के मुताबिक, 10 एकड़ से करीब 40 से 45 लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन पानी की कमी के कारण अब बाग पर हुआ खर्च निकालना भी मुश्किल लग रहा है. उनका कहना है कि एक एकड़ द्राक्ष बाग पर करीब दो से ढाई लाख रुपये तक खर्च आता है. उन्होंने सरकार से किसानों की मदद करने और खडकपूर्णा धरण या नदी जोड़ परियोजना के जरिए पानी उपलब्ध कराने की मांग की है.

दो एकड़ द्राक्ष बाग पानी के अभाव में निकालनी पड़ी

पानी की कमी का असर अब सीधे द्राक्ष बागों पर दिखाई देने लगा है. कडवंची के किसान सुनील जोशी ने अपनी पांच एकड़ की द्राक्ष बाग में से दो एकड़ की बाग पानी के अभाव में निकाल दी है.

सुनील जोशी बताते हैं कि उनकी पांच एकड़ की बाग पर करीब साढ़े छह लाख रुपये खर्च हुए थे और इससे 20 से 22 लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद थी. लेकिन कुएं में पानी नहीं है और खेत तालाब में भी करीब एक महीने का पानी बचा है. ऐसे में खर्च निकालना भी मुश्किल लग रहा है.

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सुनील जोशी का कहना है कि अगर बारिश नहीं हुई तो कडवंची इलाके की करीब 90 प्रतिशत द्राक्ष बागें प्रभावित हो सकती हैं. उन्होंने भी खडकपूर्णा धरण से पानी उपलब्ध कराने और सरकार से मदद की मांग की है.

किसानों की नजरें आसमान पर

कडवंची इलाके में लंबे समय से द्राक्ष की खेती की जा रही है. कई किसानों ने अपनी पूरी खेती को द्राक्ष उत्पादन के लिए विकसित किया है. इसके लिए कुएं, खेत तालाब और सिंचाई की दूसरी व्यवस्थाएं भी बनाई गई हैं. लेकिन इस बार बारिश कम होने से यही जलस्रोत किसानों के लिए चिंता का कारण बन गए हैं.

द्राक्ष बाग में एक बार खर्च शुरू होने के बाद पानी, दवा, मजदूरी और दूसरे कृषि कार्यों पर लगातार खर्च करना पड़ता है. ऐसे में बीच में पानी की कमी होने पर पहले किया गया खर्च भी डूबने का खतरा है.

किसानों की मांग है कि सरकार द्राक्ष उत्पादक किसानों को आर्थिक सहायता दे और कडवंची इलाके की पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाले. किसानों का कहना है कि कडवंची से करीब 18 से 20 किलोमीटर दूर खडकपूर्णा धरण से पानी उपलब्ध कराया जाए तो द्राक्ष बागों को बचाया जा सकता है.

फिलहाल कडवंची की द्राक्ष बागों को बचाने के लिए किसानों की नजरें आसमान पर टिकी हैं. बारिश हुई तो बागों को बचाने की उम्मीद है, लेकिन बारिश नहीं हुई तो लाखों रुपये खर्च करके खड़ी की गई द्राक्ष बागों के सूखने का खतरा बढ़ सकता है.

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