नीट पेपर लीक को लेकर देश के कई राज्यों में छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया था.जिसके बाद अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. कॉकरोच जनता पार्टी और केंद्र सरकार के बीच जिन तीन मांगों पर सहमति बनी थी, उनमें से एक यह भी थी कि बीजेपी और उसके समर्थन वाले राज्यों में छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी. इसकी शुरुआत हो चुकी है. बिहार और असम के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने का फैसला किया है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के गृह विभाग को छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री के इस फैसले से आंदोलन में शामिल छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
यह फैसला उस आश्वासन के बाद लिया गया है, जिसमें केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान कहा था कि नीट आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा. इसी के तहत अब महाराष्ट्र सरकार भी राज्य में दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया लागू करने जा रही है.
बिहार सरकार की तरफ से मिली राहत
नीट-यूजी पेपर लीक के आरोपों के बाद बिहार के कई हिस्सों में छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था. इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया. बाद में राज्य सरकार ने छात्रों को राहत देते हुए 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक दर्ज सभी एफआईआर, शिकायतें और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया. इसके साथ ही, आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने का भी फैसला लिया गया.
साहिल जोशी / मुस्तफा शेख