छत्रपति संभाजीनगर के तिसगांव इलाके में मौजूद खवड्या पहाड़ के पास कुछ ही घंटों में एक परिवार की पूरी जिंदगी बदल गई. 18 वर्षीय कुणाल चांदवडे किसी वजह से परेशान था. सुबह वह खवड्या पहाड़ के पास पहुंच गया. परिवार को जब उसके वहां होने की जानकारी मिली तो उसके माता-पिता भी तुरंत मौके पर पहुंचे और बेटे को समझाकर घर वापस लाना चाहते थे. इसके लिए गांव के लोग और सरपंच भी मौके पर पहुंचे. करीब तीन घंटे तक सभी लोग कुणाल को समझाने की कोशिश की. उसकी मां लगातार उससे बात करती रही.
बताया जा रहा है कि सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक खवड्या पहाड़ के पास लोगों की कोशिशें चलती रहीं. कुणाल को समझाने के लिए आसपास के गांव के लोग और सरपंच भी वहां पहुंचे थे. सरपंच ने उसे मनाने के लिए आईफोन देने की बात तक कही, लेकिन कुणाल किसी की बात सुनने के लिए तैयार नहीं हुआ. इस बीच पुलिस और अग्निशमन दल की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी. सभी ने अपनी तरफ से कुणाल को समझाने और उसे सुरक्षित वापस लाने की कोशिश की. परिवार के लोग भी लगातार उससे बातचीत करते रहे, लेकिन किसी की कोशिश कामयाब नहीं हो सकी.
काफी देर तक समझाने के बाद कुणाल के पिता मुरलीधर भी पहाड़ पर उसके पास पहुंचे. वह भी बेटे को समझाने की कोशिश करने लगे. इसी दौरान उन्होंने कुणाल को पकड़ने की कोशिश की. इसी दौरान दोनों पहाड़ से नीचे गिर गए. यह देखकर मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए. पुलिस और अग्निशमन दल के लोग भी वहां मौजूद थे. अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी और सदमा फैल गया. अपने बेटे और पति के साथ हुई घटना को देखकर मां संगीता भी बेहद सदमे में आ गईं. इसके बाद उन्होंने भी पहाड़ से छलांग लगा दी और उनकी भी जान चली गई. कुछ ही मिनटों में एक परिवार के तीन लोगों की मौत से मौके पर मौजूद लोग स्तब्ध रह गए.
बेटे को बचाने की हर कोशिश हुई नाकाम
घटना को देखने वाले तिसगांव के लोग, पुलिस और अग्निशमन दल के कर्मचारी भी इस घटनाक्रम से सदमे में आ गए. जिस जगह पर घंटों तक परिवार और गांव के लोग कुणाल को समझाने की कोशिश कर रहे थे, वहां कुछ ही समय बाद मातम का माहौल हो गया. कुणाल चांदवडे की उम्र 18 साल थी. उसके पिता का नाम मुरलीधर और मां का नाम संगीता बताया गया है. दोनों सतारा इलाके में रहते थे. घटना के बाद पुलिस ने उनके परिवार के अन्य लोगों से संपर्क करना शुरू कर दिया है.
पुलिस और अग्निशमन दल की मौजूदगी में घंटों तक कुणाल को समझाने की कोशिश की गई थी. गांव के सरपंच और आसपास के लोगों ने भी परिवार के साथ मिलकर उसे समझाने का प्रयास किया. इसके बावजूद मामला बेहद दुखद स्थिति में पहुंच गया. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दुखद बात यह रही कि माता-पिता अपने बेटे को बचाने और उसे समझाने के लिए मौके पर पहुंचे थे. करीब तीन घंटे तक मां उससे बातचीत करती रही. पिता भी पहाड़ के नीचे मौजूद रहे और बाद में बेटे के पास पहुंचकर उसे समझाने लगे.
पुलिस और फायर टीम के सामने हुआ दर्दनाक हादसा
लेकिन बेटे को बचाने की कोशिश के दौरान पिता और बेटे के साथ हुई घटना के बाद मां भी सदमे में अपनी जान गंवा बैठीं. इस तरह कुछ ही मिनटों में परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई. घटना के बाद तिसगांव के लोग भी सकते में हैं. पुलिस ने परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क किया है. पूरे घटनाक्रम ने मौके पर मौजूद लोगों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है.
इसरारउद्दीन चिश्ती