महाराष्ट्र के चंद्रपुर में कर्जमाफी की मांग को लेकर एक कर्जग्रस्त किसान ने राजुरा तहसील कार्यालय में अनोखे अंदाज में आंदोलन कर प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा. किसान बैल पर सवार होकर सीधे तहसीलदार कार्यालय में पहुंच गया और जोरदार तरीके से 'कर्जमाफी होनी ही चाहिए' की मांग उठाई. ये किसान राजुरा तहसील के गोयेगाव का है और इसका नाम दिवाकर हिरामन पहनपाटे है.
इस अनोखे आंदोलन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है. किसान के इस अलग अंदाज ने कुछ समय के लिए तहसील कार्यालय परिसर में उत्सुकता और कौतूहल का माहौल बना दिया.
जहां आमतौर पर किसान अपनी मांगों को लेकर धरना, प्रदर्शन, मोर्चा या ज्ञापन का सहारा लेते हैं, वहीं इस किसान ने ग्रामीण जीवन और कृषि व्यवस्था के प्रतीक बैल को माध्यम बनाकर अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया. लोगों का कहना है कि बैल पर सवार होकर तहसील कार्यालय पहुंचना केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि खेती-किसानी की बदहाल स्थिति और किसानों की व्यथा का प्रतीकात्मक संदेश है, किसान ने प्रशासन पर रोष व्यक्त करते हुए जमकर नारेबाजी की. इस घटना के बाद एक बार फिर किसानों की बढ़ती आर्थिक परेशानियों और लंबे समय से लंबित कर्जमाफी के मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है.
विभिन्न किसान संगठनों ने भी सरकार से मांग की है कि कर्जमाफी के प्रश्न पर जल्द निर्णय लेकर संकटग्रस्त किसानों को राहत दी जाए, एक तो मानसून ने भी अब तक किसानों को राहत नहीं दी है , ऊपर से कर्ज का बोझ , किसानों की पीड़ा को दर्शाता हुआ ये एक जीवंत नजारा है. किसान के इस अनूठे आंदोलन ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान तो खींचा ही है, साथ ही किसानों की समस्याओं को भी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
विकास राजूरकर