महाराष्ट्र के पुणे में शुक्रवार को अजब सियासी नजारा देखने को मिला. बीजेपी की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने अपनी ही पार्टी के विधायक अभिमन्यु पवार पर आरोप लगाया कि उन्होंने पुणे में मराठा अभ्यर्थियों के सम्मान समारोह के दौरान उन्हें पहली पंक्ति में बैठने से इसलिए रोका, क्योंकि वह ब्राह्मण हैं.
इस कार्यक्रम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद थे. इसमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल मराठा समुदाय के अभ्यर्थियों को सम्मानित किया गया.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मेधा कुलकर्णी ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि अभिमन्यु पवार ने उन्हें यह कहते हुए पहली पंक्ति में बैठने से रोक दिया कि यह कार्यक्रम मराठा समुदाय के लिए है. इस घटना के तुरंत बाद वह कार्यक्रम छोड़कर चली गईं.
प्रोटोकॉल का भी जिक्र
उन्होंने कहा, 'वहां कोई अन्य सांसद मौजूद नहीं था. ऐसे में अधिकारियों का मानना था कि प्रोटोकॉल के अनुसार मुझे पहली पंक्ति में बैठना चाहिए. अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक मागास विकास महामंडल के अध्यक्ष नरेंद्र पाटिल भी पहली लाइन में बैठने के अधिकारी थे.'
मेघा कुलकर्णी ने बताया, 'सच्चाई यह है कि अभिमन्यु पवार स्वयं पहली पंक्ति में बैठना चाहते थे. जब अधिकारियों ने कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार मुझे वहां बैठना चाहिए, तब पवार ने जाति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह कार्यक्रम मराठा समुदाय के लिए है. ऐसे में मेरे पहली पंक्ति में बैठने से विवाद खड़ा हो सकता है.'
विधायक ने दी ये सफाई
इस बीच इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए लातूर जिले की औसा विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक अभिमन्यु पवार ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि इस मामले में जाति का कोई सवाल नहीं था. यह महज एक गलतफहमी थी.
उन्होंने कहा, 'मैंने सिर्फ इतना कहा था कि नरेंद्र पाटिल महामंडल के अध्यक्ष हैं, इसलिए वे पहली पंक्ति में बैठ सकते हैं. विधायक और सांसद दूसरी लाइन में बैठ सकते हैं. इसमें जाति का कोई मुद्दा नहीं है. वहां कई लोग मौजूद थे. उन लोगों ने मेरी बात सुनी थी.
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