इंस्टाग्राम पर दिखा एक वीडियो. वीडियो में देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जैसी दिखने वाली शख्स निवेश की सलाह देती नजर आईं. एक कारोबारी को लगा कि मौका सही है. उसने लिंक पर क्लिक किया. इसके बाद शुरू हुआ ऐसा खेल, जिसमें दो महीने के भीतर उससे 1.07 करोड़ रुपये ठग लिए गए. पुलिस का कहना है कि ठगों ने AI से बना डीपफेक (फर्जी) वीडियो दिखाकर भरोसा जीता. फिर नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और स्पेसएक्स (SpaceX) के प्री-लिस्टिंग शेयरों में निवेश का लालच देकर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए. फिलाहल, पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
क्या है पूरा मामला, चलिए इसे भी समझ लेते हैं. दरअसल, जून की शुरुआत में कारोबारी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो देखा. वीडियो बिल्कुल असली जैसा लग रहा था. उसमें ट्रेडिंग के जरिए अच्छी कमाई का दावा किया गया था. लिंक पर क्लिक करते ही एक शख्स ने खुद को निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताया. उसने कहा कि यह निवेश सुरक्षित है और अच्छा मुनाफा देगा. बातचीत के दौरान कारोबारी से आधार कार्ड समेत कई निजी दस्तावेज ले लिए गए.
इसके बाद, अगले दिन एक दूसरे व्यक्ति ने टेलीग्राम पर संपर्क किया. उसने खुद को रिलेशनशिप मैनेजर बताया. उसकी मदद से कारोबारी का एक ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाया गया. शुरुआत में 20,341 रुपये निवेश कराए गए.
पहले मुनाफा दिखाया, फिर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए
पहला निवेश होते ही ठगों ने कारोबारी के बैंक खाते में 1,000 रुपये भेज दिए. इसे पहले निवेश का मुनाफा बताया गया. इससे कारोबारी को भरोसा हो गया कि प्लेटफॉर्म असली है.
कुछ दिन बाद ठगों ने नया लालच दिया. उन्होंने कहा कि एलन मस्क की कंपनी SpaceX के प्री-लिस्टिंग शेयर खरीदने का खास मौका है. दावा किया गया कि इससे कम समय में कई गुना फायदा होगा. इस झांसे में आकर कारोबारी ने 2 जून से 23 जुलाई के बीच 36 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 1.07 करोड़ रुपये कई बैंक खातों में भेज दिए.
स्क्रीन पर बढ़ता रहा मुनाफा
ठगों ने फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया. कुछ समय बाद कारोबारी के अकाउंट में करीब 3.98 करोड़ रुपये दिखाई देने लगे. भरोसा बनाए रखने के लिए बीच में करीब 7 लाख रुपये निकालने भी दिए गए. इससे उन्हें लगा कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित है. हुआ ये कि कारोबारी ने पूरी रकम निकालने की कोशिश की, तब ठगों ने और पैसे जमा करने की मांग शुरू कर दी. इसके बाद उन्होंने जवाब देना भी बंद कर दिया. तभी कारोबारी को ठगी का पता चला.
पीड़ित ने पहले नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पुणे साइबर पुलिस में FIR दर्ज हुई. पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और इस पूरे गिरोह से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है.
यह मामला दिखाता है कि AI से बने फर्जी वीडियो अब साइबर ठगी का नया हथियार बन चुके हैं. किसी भी निवेश से पहले वीडियो या विज्ञापन पर आंख बंद करके भरोसा न करें. हमेशा कंपनी और प्लेटफॉर्म की आधिकारिक जानकारी जांच लें. थोड़ी सी सावधानी करोड़ों रुपये का नुकसान होने से बचा सकती है.
ओमकार